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साल 2025 के Mann Ki Baat के पहले एपिसोड में प्रधानमंत्री ने क्या-क्या कहा, जानें इस बार शनिवार को क्यों आया एपिसोड

प्रधानमंत्री ने Mann Ki Baat के पहले एपिसोड में पश्चिम बंगाल के गंगा सागर मेले का भी जिक्र किया. पीेम ने कहा, “कुछ दिन पहले ही पश्चिम बंगाल में ‘गंगा सागर’ मेले का भी विहंगम आयोजन हुआ है. संक्रांति के पावन अवसर पर इस मेले में पूरी दुनिया से आए लाखों श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई है.

Mann Ki Baat 2025: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज साल 2025 के मन की बात के पहले एपिसोड को संबोधित किया. मन की बात के इस एपिसोड में पीएम मोदी ने कहा कि हर बार मन की बात का एपिसोड रविवार को आता है पर अगला रविवार गणतंत्र दिवस होने की वजह से इस बार हम एक सप्ताह पहले आ गए हैं. पीएम मोदी ने मन की बात में कहा कि यह साल गणतंत्र दिवस का 75वां वर्षगांठ है यानि इस बार गणतंत्र दिवस पर संविधान लागू होने के 75 साल पूरे हो रहे हैं.

पीएम मोदी ने संविधान निर्माताओं को याद करते हुए कहा कि संविधान सभा के उन सभी महान व्यक्तित्व को नमन तरता हूं, जिन्होंने हमें हमारा पवित्र संविधान दिया.

पीएम ने कहा कि आज के इस एपिसोड में मेरी कोशीश है कि आपको देश के कुछ महान नेताओं की ओरिजनल आवाज सुनाऊं.

बाबा साहेब अंबेडकर के बारे में याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि अंबेडकर ने परस्पर सहयोग को लेकर एक महत्वपूर्ण बात कही थी, जो अंग्रेजी में है. जिसके बाद एपिसोड में बाबा साहेब की स्पीच का एक अंश प्ले किया गया.

बाबा साहेब के बाद पीएम ने एपिसोड में डॉ.राजेन्द्र प्रसाद और श्यामा प्रसाद मुखर्जी का ओरिजनल भाषण भी चलाया.

प्रधानमंत्री ने गणतंत्र दिवस के पहले (25 जनवरी) को आने वाला राष्ट्रीय मतदाता दिवस के बारे में भी चर्चा की. उन्होंने कहा कि यह दिन इसलिए भी अहम है क्यां कि इस दिन भारतीय चुनाव आयोग की स्थापना हुई थी.

प्रधानमंत्री ने चुनाव आयोग को धन्यवाद देते हुए कहा कि हमारे आयोग ने समय-समय पर हमारे मतदान प्रक्रिया को आधुनिक और मजबूत बनाया है. पीएम मोदी ने कहा कि मैं चुनाव आयोग को निष्पक्ष चुनाव के उनके कमिटमेंट के लिए धन्यवाद देता हूं.

कुंभ विविधता में एकता का उत्सव है

महाकुंभ पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रयागराज में महाकुंभ का श्री गणेश हो चुका है. कुंभ का यह उत्सव विविधता में एकता का उत्सव मनाता है. हजारों वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में कहीं भी कोई भेदभाव और जातिवाद नहीं है. कुंभ में गरीब-अमीर सब एक हो जाते हैं. कुंभ में लोग एक साथ डुबकी लगाते हैं, प्रसाद लेते हैं और एक साथ भंडारे में भोजन करते हैं. तभी तो कुंभ एकता का महाकुंभ है.

सुभाष चंद्र बोस के बारे में

पीएम मोदी ने आगे कहा कि 23 जनवरी यानि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जन्म-जयंती को अब हम ‘पराक्रम दिवस’ के रूप में मनाते हैं. उनके शौर्य से जुड़ी इस गाथा में भी उनके पराक्रम की झलक मिलती है. कुछ साल पहले मैं उनके उसी घर में गया था, जहां से वे अंग्रेजों को चकमा देकर निकले थे. उनकी वो कार अब भी वहां मौजूद है. वो अनुभव मेरे लिए बहुत ही विशेष रहा. सुभाष बाबू एक विजनरी थे. साहस तो उनके स्वभाव में रचा-बसा था. इतना ही नहीं, वे बहुत कुशल प्रशासक भी थे.

पश्चिम बंगाल के गंगा सागर मेले का भी जिक्र किया

प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल के गंगा सागर मेले का भी जिक्र किया. पीेम ने कहा, “कुछ दिन पहले ही पश्चिम बंगाल में ‘गंगा सागर’ मेले का भी विहंगम आयोजन हुआ है. संक्रांति के पावन अवसर पर इस मेले में पूरी दुनिया से आए लाखों श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई है. कुंभ, पुष्करम और गंगा सागर मेला हमारे ये पर्व हमारे सामाजिक मेल-जोल को, सद्भाव को, एकता को बढ़ाने वाले पर्व हैं. ये पर्व भारत के लोगों को भारत की परंपराओं से जोड़ते हैं. जैसे हमारे शास्त्रों ने संसार में धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष, चारों पर बल दिया है. वैसे ही हमारे पर्वों और परंपराएं भी आध्यात्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक, हर पक्ष को भी सशक्त करते हैं.”

पीएम मोदी ने कहा, इस महीने हमने ‘पौष शुक्ल द्वादशी’ के दिन रामलला के प्राण प्रतिष्ठा पर्व की पहली वर्षगांठ मनाई है. इस साल पौष शुक्ल द्वादशी 11 जनवरी को पड़ी थी. इस दिन लाखों राम भक्तों ने अयोध्या में रामलला के साक्षात दर्शन कर उनका आशीर्वाद लिया. प्राण प्रतिष्ठा की ये द्वादशी भारत की सांस्कृतिक चेतना की पुनः प्रतिष्ठा की द्वादशी है. इसलिए पौष शुक्ल द्वादशी का ये दिन एक तरह से प्रतिष्ठा द्वादशी का दिन भी बन गया है. हमें विकास के रास्ते पर चलते हुए ऐसे ही अपनी विरासत को भी सहेजना है और उनसे प्रेरणा लेते हुए आगे बढ़ना है.

-भारत एक्सप्रेस



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