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क्या है कामराज प्लान? BJP और मोदी सरकार ने किया लागू तो सियासत में आएगा 1963 का दौर

BJP PM Modi Kamaraj Plan: क्या भाजपा में लागू होने जा रहा है ऐतिहासिक ‘कामराज प्लान’? साल 2029 के चुनावों से पहले मोदी सरकार कई हैवीवेट मंत्रियों को कैबिनेट से मुक्त कर संगठन को मजबूत करने के लिए बड़ी सांगठनिक साफ-सफाई कर सकती है. जानें पूरी इनसाइड स्टोरी

BJP PM Modi Kamaraj Plan

BJP PM Modi Kamaraj Plan: क्या भारतीय जनता पार्टी और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार अपने तीसरे कार्यकाल के सबसे बड़े राजनीतिक ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की तैयारी कर रही है? कूटनीतिक और राजनीतिक गलियारों में इस समय एक ही सवाल सबसे तेजी से तैर रहा है. लगातार 12 वर्षों से केंद्र की सत्ता पर काबिज होने और देश के अधिकांश राज्यों में सरकार चलाने के बाद भाजपा के भीतर एक स्वाभाविक सांगठनिक थकान की बातें चल रही हैं. माना जा रहा है कि इस थकान को दूर करने और साल 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए ऐतिहासिक रणनीति पर मंथन शुरू हो चुका है. इसी बीच BJP और पीएम मोदी सरकार में के कामराज प्लान लागू करने की चर्चा चल पड़ी है.

यदि पीएम मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की जोड़ी ने इस रणनीति को धरातल पर उतारा, तो न केवल देश की केंद्रीय कैबिनेट का पूरा भूगोल बदल जाएगा, बल्कि देश की दशा और दिशा भी पूरी तरह परिवर्तित हो जाएगी. आइये जानें क्या है के कामराज प्लान और इसका वर्तमान में क्या-क्या असर हो सकता है?

क्या है ‘कामराज प्लान’? (What is Kamaraj Plan 1963)

बात मध्य 1963 की है, जब देश 1962 में चीन के साथ हुए युद्ध के सदमे से गुजर रहा था और तत्कालीन सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी की लोकप्रियता का ग्राफ तेजी से नीचे गिर रहा था. उस समय तत्कालीन मद्रास (अब तमिलनाडु) के कद्दावर मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता के कामराज ने जवाहरलाल नेहरू के सामने एक बेहद अनूठा और क्रांतिकारी प्रस्ताव रखा.

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कामराज का सीधा सिद्धांत था कि पार्टी के शीर्ष और सबसे कद्दावर नेताओं को सरकार के ऐशो-आराम और लाल बत्ती (मंत्रालय) का सुख स्वेच्छा से त्याग देना चाहिए और जमीन पर उतरकर चौबीसों घंटे संगठन को मजबूत करने के काम में जुट जाना चाहिए. के. कामराज ने खुद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर इसकी शुरुआत की जिसके बाद नेहरू कैबिनेट के 6 बड़े केंद्रीय मंत्रियों (जिनमें मोरारजी देसाई, जगजीवर राम और लाल बहादुर शास्त्री शामिल थे) और देश के 6 मुख्यमंत्रियों ने अपने पदों से स्वेच्छा से त्यागपत्र दे दिया था

पूरी तरह पीएम मोदी के कंधों बोझ (Why BJP Need Kamaraj Plan)

अब सवाल ये कि आखिर साल 2026 में मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के दौरान इस 63 साल पुराने प्लान की चर्चा क्यों दोबारा शुरू हुई है? एक समाचार चैनल से बात करते हुए वरिष्ठ पत्रकार ए. सूर्य प्रकाश के मुताबिक, पिछले 12 वर्षों में मोदी सरकार ने डिजिटल इंडिया, इंफ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस, सोशल वेलफेयर और इकॉनमी के मोर्चे पर अभूतपूर्व और फिनोमिनल सफलता हासिल की है. इतना ही नहीं सूर्य प्रकाश ने आगे कहा कि

कड़वा सच यह है कि इस पूरी सफलता का क्रेडिट सिर्फ और सिर्फ अकेले पीएम मोदी के चेहरे को जाता है. केंद्र सरकार के 71 सदस्यीय मंत्रिपरिषद में गिने-चुने अपवादों को छोड़ दिया जाए तो ऐसा प्रतीत होता है कि वादों को जमीन पर पूरा करने और जनता के बीच जाने का पूरा बोझ अकेले पीएम मोदी के कंधों पर है.

इसके अलावा, 14 करोड़ से अधिक प्राथमिक सदस्यों का दावा करने वाली दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा के भीतर भी एक ठहराव आ गया है. दो-तीन दशक पहले जब अरुण जेटली, प्रमोद महाजन या खुद नरेंद्र मोदी जैसे हैवीवेट नेता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हुआ करते थे, तो वे राज्यों का दौरा कर संकटमोचक की भूमिका निभाते थे और संगठन में जान फूंकते थे. आज स्थिति यह है कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के कारण कई मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों में एक अज्ञात अहंकार आ गया है और वे जमीनी कार्यकर्ताओं (कैडर) से पूरी तरह कट चुके हैं.

संगठन और सरकार में फेरबदल

नितिन नबीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद अब पार्टी और सरकार के बीच एक नए संतुलन का खाका खींचा जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कामराज प्लान के तहत कई कद्दावर मंत्रियों को कैबिनेट से मुक्त करके सीधे संगठन में भेजा जाएगा.

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कयास लगाए जा रहे हैं कि केंद्र सरकार के कुछ ऐसे ‘हैवीवेट’ मंत्री, जो अपने-अपने राज्यों में मजबूत राजनीतिक पैठ और लंबा प्रशासनिक अनुभव रखते हैं, उन्हें कैबिनेट से हटाकर राष्ट्रीय महासचिव या राज्य इकाई का अध्यक्ष बनाया जा सकता है. इससे पीएम मोदी के कंधों से राजनीतिक बोझ कम होगा और वे पूरी तरह से नीति-निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे. वहीं संगठन में पिछले कई वर्षों से लगातार पसीना बहा रहे आक्रामक और युवा चेहरों को प्रमोट करके सीधे केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा.

क्या होगा ट्रांसफर पोस्टिंग का असर? (Kamaraj Plan Effect In BJP And Govt)

इस ट्रांसफर और फेरबदल का सबसे बड़ा असर अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश, गुजरात, पंजाब, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्यों के विधानसभा चुनावों पर पड़ेगा. साथ ही, दक्षिण भारत में जहां भाजपा को अपने पैर पसारने के लिए नई ऊर्जा की सख्त जरूरत है, वहां इन कद्दावर सांगठनिक चेहरों को तैनात कर पार्टी का विस्तार किया जाएगा.

क्या कड़ा फैसला लेंगे प्रधानमंत्री मोदी? (Will PM Modi Use Kamaraj Plan)

पीएम मोदी अपने कड़े और लीक से हटकर लिए जाने वाले फैसलों के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं. हालांकि, उनका एक स्वभाव यह भी रहा है कि वे अपने पुराने सहयोगियों को लंबे समय तक अवसर देते हैं और बार-बार कैबिनेट नहीं बदलते. ऐसे में यह मिलियन-डॉलर का सवाल है कि क्या पीएम मोदी भविष्य की नई लीडरशिप तैयार करने और 2029 के चक्रव्यूह को भेदने के लिए इस कड़े ‘कामराज प्लान’ को पूरी ताकत से लागू करेंगे? यदि ऐसा होता है, तो भारतीय राजनीति का स्वरूप हमेशा के लिए बदल जाएगा.



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