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जब एक Gangster से Ratan Tata को मिली थी जान से मारने की धमकी! डटकर किया था मुकाबला, नहीं मानी थी हार

टाटा समूह के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें उन्होंने एक गैंगस्टर से सामना होने का दिलचस्प किस्सा सुनाया है.

रतन टाटा. (फोटो: Wikipedia)

रतन टाटा (Ratan Tata) का नाम भला कौन नहीं जानता. वह देश के जाने-माने उद्योगपतियों में एक हैं, जिनके नेतृत्व में टाटा समूह (Tata Group) में देश की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है.

टाटा समूह के प्रमुख के रूप में उन्होंने जिंदगी में आए उतार चढ़ावों को बेहद शालीनता और गरिमापूर्ण तरीके से पार किया. हाल ही उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जो वैसे तो कई साल पुराना है, लेकिन इस वीडियो में कही गई उनकी बात चर्चा में है.

इस वीडियो को कोलंबिया बिजनेस स्कूल (Columbia Business School) द्वारा तकरीबन 10 साल पहले अपने यूट्यूब चैनल पर पोस्ट किया गया था. इस वीडियो में उन्होंने एक गैंगस्टर (Gangster) से सामना होने और उसका मुकाबला करने का अनुभव साझा किया है.

तब वह कंपनी के चेयरमैन बने थे

इस वीडियो में रतन टाटा कहते हैं, ‘मेरे चेयरमैन बनने के कुछ दिनों बाद ही टेल्को (Telco), जिसे अब टाटा मोटर्स (Tata Motors) कहा जाता है, में एक बहुत बड़ा यूनियन विवाद हुआ था. यूनियन में एक गैंगस्टर था, जिसे लगा कि यूनियन के पास काफी पैसा है, वह उस पर कंट्रोल करना चाहता था.’

वे कहते हैं, ‘उसके लगभग 200 समर्थक थे, जो हिंसक और डराने-धमकाने वाले थे. उस प्लांट के बाकी 4,000 लोगों का इससे कोई लेना-देना नहीं था, लेकिन हमने यूनियन को हल्के में लेकर गलती की थी. कर्मचारी इंतजार करने और यह देखने के लिए बहुत खुश थे कि हिंसा से उन्हें क्या मिलता है. पूरा मुद्दा यह था कि वह गैंगस्टर यूनियन पर कब्जा करना चाहता था और हम उसे ऐसा नहीं करने देना चाहते थे, इसलिए हमने उसका सामना किया.’

लोगों की दो राय

उन्होंने कहा कि इस मामले पर लोगों की दो राय थी. लोगों को लगा कि हमें उसे खुश करना चाहिए, उसे अपने पक्ष में करके स्थिति ठीक करनी चाहिए और मेरा मानना ​​था कि हमें ऐसा कभी नहीं करना चाहिए.

रतन टाटा कहते हैं, ‘पुलिस उसकी जेब में थी, आप पुलिस के पास जा सकते थे और संभावना थी कि कुछ नहीं होता. फिर वह एक बहुत ही बुरे रास्ते पर निकल पड़ा. देर रात दो बजे वह हमारे अधिकारियों के घर जाकर घंटी बजाता और फिर उनकी जांघ में चाकू मार देता ताकि वे मर न जाएं, लेकिन उन सभी को सर्जरी के लिए जाना पड़ा. इस तरह से उसने मैनेजमेंट को हताश और परेशान करने की कोशिश की.’

मुंबई में टाटा मोटर्स का हेडक्वाटर.

उनके अनुसार, और फिर मुझ पर दबाव बढ़ गया कि मैं क्यों नहीं झुक रहा. हालांकि मैंने सोचा कि यह बात यहीं खत्म नहीं होने वाली है और वह (गैंगस्टर) सब कुछ अपने कब्जे में ले लेगा. यूनियन को एक गैंगस्टर की तरह चलाएगा और इसके पास मौजूद सारा पैसा लूट लेगा.

कंपनी में हड़ताल शुरू हो गई

वीडियो में वे कहते हैं, ‘इन​ स्थितियों को देखते हुए मैंने उसका लगातार उसका सामना किया. उसने हड़ताल कर दी और कंपनी में सब कुछ ठप पड़ गया. मैंने श्रमिकों को वापस काम पर आने के लिए कहा, लेकिन वे सभी वापस आने से डर रहे थे कि वह उनके परिवार आदि के साथ कुछ बुरा कर देगा. इसके बाद मैं गया और कर्मचारियों के साथ तीन दिनों तक प्लांट में रहा. वे वापस आने लगे थे और हमने प्रोडक्शन फिर से शुरू करना शुरू कर दिया. इसके बाद परचेज और एकाउंट विभाग से लोगों ने अपनी ताकत लगाई.’

उन्होंने कहा, ‘हमने गाड़ियों का प्रोडक्शन शुरू कर दिया और वह (गैंगस्टर) लगातार यही कहता रहा कि प्लांट बंद हो गया है. फिर हमने कुछ विज्ञापन निकाले, जिनमें हमने वापस आए कर्मचारियों की संख्या दिखाई. वे वैसे भी धीरे-धीरे वापस आ रहे थे, लेकिन उसने देखा कि मैनेजमेंट दृढ़ है, इसलिए आखिरकार वह हार गया.’

जान से मारने की धमकी

रतन टाटा आगे कहते हैं, ‘फिर पुलिस ने हस्तक्षेप किया. उन्होंने उसे और उसके कई साथियों को गिरफ्तार कर लिया और हड़ताल समाप्त हो गई. तब निश्चित रूप से सभी ने कहा कि भगवान का शुक्र है कि आपने यह कर दिखाया.’

वे कहते हैं, ‘इसके बाद जैसे ही वह जेल से बाहर आया, उसने धमकी दी कि वह मुझे मार डालेगा और फिर सभी ने कहा कि आप सब जानते हो तो उसके साथ समझौता क्यों नहीं कर लेते. हालांकि हमने कभी ऐसा नहीं किया और यह कंपनी और इसके कर्मचारियों के आपसी संबंधों का महत्वपूर्ण मोड़ था. आज जब पीछे मुड़कर देखता हूं तो लगता है कि यह मसला किसी और तरीके से नहीं सुलझ पाता.’

पद्मभूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित

उद्योगपति और टाटा सन्स के पूर्व चेयरमैन रतन नवल टाटा का जन्म जन्म 28 दिसंबर 1937 को मुंबई में हुआ था. वे 1990 से 2012 तक टाटा समूह के अध्यक्ष थे और अक्टूबर 2016 से फरवरी 2017 तक अंतरिम अध्यक्ष रहे थे. साल 2000 में तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण प्राप्त करने के बाद 2008 में उन्हें भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण मिला.

-भारत एक्सप्रेस

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