यूपी में अब कानून का शासन- सीएम योगी
UP News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि राज्य अब उस दौर से काफी आगे निकल चुका है, जब अपराधी और माफिया व्यवस्था पर प्रभाव डालते थे. उनके मुताबिक, आज प्रदेश में कानून का शासन स्थापित हो चुका है और इसी वजह से उत्तर प्रदेश की पहचान देशभर में बदली है. मुख्यमंत्री शनिवार को लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे.
कार्यक्रम की शुरुआत उन्होंने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर और पुष्प अर्पित करके की. इस अवसर पर छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की, जबकि मेधावी विद्यार्थियों को मुख्यमंत्री ने पदक प्रदान कर सम्मानित किया.
2017 से पहले की स्थिति का किया जिक्र
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश को लेकर कानून-व्यवस्था और निवेश के माहौल पर लगातार सवाल उठते थे. उस समय माफिया संस्कृति के कारण विकास कार्य प्रभावित होते थे और निवेशकों में भी भरोसे की कमी दिखाई देती थी. उन्होंने कहा कि सरकार ने कानून का राज स्थापित करने की दिशा में काम किया, जिसके परिणामस्वरूप प्रदेश की छवि में बड़ा बदलाव आया है.
योगी आदित्यनाथ ने साफ शब्दों में कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई भी व्यक्ति या कोई भी पद संविधान से ऊपर नहीं हो सकता.
अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की सलाह
मुख्यमंत्री ने युवा अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि अगर उनके सामने किसी प्रकार का अन्याय हो रहा है तो चुप रहना उचित विकल्प नहीं है. उन्होंने कहा कि अंतिम फैसला चाहे इतिहास सुनाए, लेकिन न्याय और सत्य के पक्ष में तर्क रखना वकीलों की जिम्मेदारी होती है.
उन्होंने कहा कि विधि क्षेत्र से जुड़े युवाओं को संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए और अपने पेशे को केवल नौकरी नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में देखना चाहिए.
आपातकाल का उदाहरण देकर समझाया कानून का महत्व
योगी आदित्यनाथ ने भारतीय लोकतंत्र की महत्वपूर्ण तिथियों का जिक्र करते हुए कहा कि 15 अगस्त 1947 और 26 जनवरी 1950 जितनी अहम हैं, उतनी ही महत्वपूर्ण 25 जून 1975 की तारीख भी है. उन्होंने कहा कि आपातकाल की घटना ने देश को यह समझाया कि कानून के शासन और शासक के शासन में कितना अंतर होता है.
मुख्यमंत्री ने न्यायमूर्ति एचआर खन्ना का उल्लेख करते हुए कहा कि सिद्धांतों और मूल्यों के पक्ष में लिया गया साहसिक निर्णय व्यक्ति को इतिहास में विशेष स्थान दिलाता है.
सत्य और अध्ययन को बताया वकील की सबसे बड़ी ताकत
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने युवा वकीलों से कहा कि ‘सत्यं वद, धर्मं चर, स्वाध्यायान्मा प्रमदः’ जैसे आदर्श वाक्यों को केवल कार्यालय या चैंबर की दीवारों तक सीमित न रखें, बल्कि जीवन में उतारें.
उन्होंने कहा कि सत्यनिष्ठा और लगातार अध्ययन किसी भी अधिवक्ता की वास्तविक पूंजी होते हैं. डॉ. राम मनोहर लोहिया के विचारों का उल्लेख करते हुए योगी ने कहा कि एक विधिवेत्ता के भीतर शिव जैसा चिंतन, कृष्ण जैसी संवेदनशीलता और राम जैसी वाणी होनी चाहिए.
विकसित भारत के लक्ष्य में वकीलों की भूमिका
मुख्यमंत्री ने विकसित भारत के विजन को एक मुकदमे की तरह बताते हुए कहा कि 140 करोड़ भारतीयों के सपनों की इस पैरवी को तथ्यों, साक्ष्यों और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ाना होगा. उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने की दिशा में युवा अधिवक्ताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है.
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश को वर्ष 2029-30 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है.
एआई और साइबर अपराधों पर भी जताई चिंता
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कई कामों को आसान बना सकती है, लेकिन अंतिम फैसला हमेशा मानवीय विवेक के आधार पर ही होना चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि किसी दस्तावेज या मसौदे में लापरवाही के कारण किसी निर्दोष व्यक्ति की स्वतंत्रता भी प्रभावित हो सकती है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि डीपफेक तकनीक और बढ़ते साइबर अपराधों ने साक्ष्यों की विश्वसनीयता को नई चुनौती दी है. उन्होंने जानकारी दी कि प्रदेश के सभी 75 जिलों में साइबर थाने स्थापित किए गए हैं, जबकि 1,583 थानों में साइबर हेल्प डेस्क काम कर रही हैं. साथ ही ‘एआई प्रज्ञा’ कार्यक्रम के जरिए 10 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है.
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छात्रों को दिए जीवन के अहम मंत्र
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि वे अन्याय के खिलाफ डटकर खड़े हों, अपनी जड़ों और समाज से जुड़े रहें तथा निरंतर ज्ञान अर्जित करते रहें. उन्होंने गांवों में जमीन से जुड़े झगड़ों और पारिवारिक विवादों के समाधान में भी सक्रिय योगदान देने की सलाह दी. साथ ही कहा कि किसी भी परिस्थिति में अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए.
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