शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे द्वारा तीन भाषाओं के विवाद पर महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधने और इस बात की अटकलों के बीच कि दोनों भाई बीएमसी चुनावों के लिए एक साथ आ सकते हैं, महाराष्ट्र कांग्रेस ने सोमवार को पार्टी को मजबूत करने और बीएमसी चुनावों के लिए रणनीति तैयार करने के लिए एक बैठक की. सूत्रों से संकेत मिला है कि कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ सकती है.
महाराष्ट्र कांग्रेस की बैठक में कई अन्य लोग हुए शामिल
महाराष्ट्र कांग्रेस की बैठक कल पुराने पार्टी मुख्यालय में हुई और इसकी अध्यक्षता पार्टी के राज्य प्रभारी रमेश चेनिथल्ला ने की. इसमें महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख हर्षवर्धन सपकाल, मुंबई कांग्रेस प्रमुख वर्षा गायकवाड़, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण, नसीम खान, रजनी पाटिल, मुकुल वासनिक, नाना पटोले, बालासाहेब थोराट और कई अन्य लोग शामिल हुए.
सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान राज्य में पार्टी को मजबूत करने और इस साल के अंत में होने वाले बृहन्मुंबई नगर निगम चुनावों की तैयारियों पर चर्चा की गई. कांग्रेस बीएमसी चुनावों में अकेले जाने का फैसला कर सकती है और उसने वर्षा गायकवाड़ को सभी 228 सीटों पर तैयारी करने के लिए कहा है.
सूत्र के मुताबिक वर्षा गायकवाड़ को बीएमसी चुनावों में अकेले जाने के लिए तैयार रहने और फैसला करने के लिए कहा गया है, लेकिन शिवसेना (यूबीटी) को कोई नकारात्मक संदेश दिए बिना, क्योंकि यह राज्य में महाराष्ट्र विकास अघाड़ी गठबंधन का हिस्सा है.
राज ठाकरे ने 20 साल पहले शिवसेना से तोड़ा था नाता
राज ठाकरे ने 20 साल पहले शिवसेना से नाता तोड़कर अपनी अलग पार्टी महाराष्ट्र निर्माण सेना (मनसे) बना ली थी. हालांकि, कांग्रेस के सूत्र ने खुलासा किया कि पार्टी के कई नेताओं का मानना है कि राज्य में पार्टी को मजबूत करना जरूरी है क्योंकि इसकी हालत खराब हो रही है और पार्टी के हितों की रक्षा के लिए इसे बीएमसी चुनावों में अकेले जाना चाहिए क्योंकि राज्य में यह अपने गठबंधन सहयोगियों के हाथों मतदाताओं को खो रही है.
कुछ सदस्यों ने यह भी कहा कि बीएमसी चुनाव पार्टी को नया नेतृत्व तैयार करने में भी मदद करते हैं और इसलिए बीएमसी चुनाव में अकेले चुनाव लड़ना महत्वपूर्ण है. हालांकि, सूत्र ने कहा कि अगर उद्धव और राज ठाकरे बीएमसी चुनाव के लिए साथ आते हैं, तो पार्टी अकेले चुनाव लड़ने पर विचार करेगी और एमवीए गठबंधन बरकरार रहेगा क्योंकि चुनाव के बाद यह एक साथ आ जाएगा ,कांग्रेस पिछले साल विधानसभा चुनाव और आम चुनाव में कम सीटें मिलने से भी नाराज है, जिसमें उसे मुंबई में क्रमशः 11 और 2 सीटें मिली थीं.
गौरतलब है कि कांग्रेस का गठन मुंबई में हुआ था और 2007 से पार्टी का प्रदर्शन गिरता जा रहा है. 2007 के बीएमसी में कांग्रेस 75 सीटें जीतने में सफल रही थी. 2012 में नतीजे नीचे चले गए और पार्टी बीएमसी में केवल 56 सीटें जीतने में सफल रही, जबकि 2017 में यह और गिरकर 31 पर आ गई. पूर्व नगरसेवकों में से कई कांग्रेस छोड़कर सत्तारूढ़ शिवसेना और भाजपा में शामिल हो गए हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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