कांग्रेस पार्टी को अपने राष्ट्रीय मुख्यालय 24 अकबर रोड और 5 रायसीना रोड को खाली करने के नोटिस मिले हैं. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि इन दोनों जगहों को खाली करने की आखिरी तारीख 28 मार्च है. इंदिरा गांधी के समय से 24 अकबर रोड कांग्रेस का ऑफिस बना हुआ था. ये कई ऐतिहासिक निर्णयों और घटनाक्रमों का गवाह रहा है.
इतिहास से जुड़ा एक अहम केंद्र
24 अकबर रोड सिर्फ एक कार्यालय नहीं, बल्कि दशकों से कांग्रेस की राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है. इंदिरा गांधी के समय से यह जगह कई महत्वपूर्ण फैसलों और घटनाओं की साक्षी रही है. इसके पास स्थित 10 जनपथ जहां सोनिया गांधी का निवास है के साथ इसका गहरा संबंध रहा है, जिसने इसे पार्टी के ‘पावर सेंटर’ के रूप में स्थापित किया.
मुख्यालय का बदलता सफर
कांग्रेस का इतिहास उसके बदलते ठिकानों में भी झलकता है. आज़ादी से पहले मोतीलाल नेहरू का इलाहाबाद स्थित आनंद भवन इसका प्रमुख केंद्र था.
स्वतंत्रता के बाद पार्टी का मुख्यालय दिल्ली में स्थापित हुआ, लेकिन 1969 में हुए 1969 कांग्रेस विभाजन के बाद पार्टी को कई अस्थायी स्थानों से काम करना पड़ा. विंडसर प्लेस से लेकर 5 राजेंद्र प्रसाद रोड तक के सफर के बाद 1978 में 24 अकबर रोड स्थायी मुख्यालय बना.
मौजूदा स्थिति और विकल्प
फिलहाल कांग्रेस इस नोटिस के खिलाफ कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है और सरकार से कुछ समय की मोहलत मांगने की योजना बना रही है. साथ ही अशोक गहलोत और दिग्विजय सिंह जैसे वरिष्ठ नेताओं के जरिए आवास आवंटन की संभावनाएं तलाशने पर भी चर्चा हो रही है. यह दर्शाता है कि पार्टी इस स्थिति से निपटने के लिए विभिन्न रणनीतियों पर काम कर रही है.
नई शुरुआत की ओर
जनवरी 2025 में कांग्रेस ने अपने नए मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ का उद्घाटन किया. इस मौके पर मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे. इस नए मुख्यालय को लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय के मूल्यों का प्रतीक बताया गया. वही मूल्य जो महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल और जवाहरलाल नेहरू की विरासत से जुड़े हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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