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कांग्रेस का नया ‘कनेक्ट सेंटर’ मॉडल: वॉर रूम अब सालभर करेगा काम, बूथ से दिल्ली तक होगी संगठन की निगरानी

कांग्रेस अब चुनावी वॉर रूम को सालभर चलने वाले ‘कनेक्ट सेंटर’ में बदल रही है. इसके जरिए 1 घंटे के भीतर मंडल स्तर तक मैसेज पहुंचेगा और काम न करने वाले नेताओं पर गाज गिरेगी.

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Edited by Vaibhav Gupta

कांग्रेस चुनावी वॉर रूम की व्यवस्था को अब सालभर सक्रिय रहने वाले ‘कनेक्ट सेंटर’ में बदलने जा रही है. इन सेंटरों के जरिए केंद्रीय नेतृत्व जमीनी कार्यकर्ताओं से सीधे फीडबैक लेगा, संगठनात्मक कामकाज की निगरानी करेगा और नेताओं के प्रदर्शन का लगातार आकलन किया जाएगा.

कांग्रेस ने अपने संगठन और कम्युनिकेशन सिस्टम में बड़ा बदलाव करने की तैयारी शुरू कर दी है. पार्टी चुनावों के दौरान इस्तेमाल होने वाले ‘वॉर रूम’ को अब सालभर काम करने वाले ‘कनेक्ट सेंटर’ में बदल रही है. इन सेंटरों का मकसद केंद्रीय नेतृत्व और बूथ स्तर तक फैले संगठन के बीच लगातार संवाद और फीडबैक का सिस्टम तैयार करना है.

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, राज्यों में बनाए जा रहे कनेक्ट सेंटर पार्टी के नेताओं और प्रोफेशनल्स की टीम के जरिए संचालित होंगे. इन सेंटरों की समीक्षा बैठकें कांग्रेस महासचिव (संगठन) के. सी. वेणुगोपाल की अध्यक्षता में होंगी. कांग्रेस की योजना साल के अंत तक सभी राज्यों में कनेक्ट सेंटर स्थापित करने की है.

एक घंटे से कम समय में मंडल स्तर तक पहुंचेगा संदेश

कांग्रेस के नए सिस्टम में डेटा और तकनीक की अहम भूमिका होगी. पार्टी सूत्रों का कहना है कि संगठन के व्यापक नेटवर्क और नेताओं-कार्यकर्ताओं के डेटा के आधार पर कनेक्ट सेंटर केंद्रीय नेतृत्व का संदेश एक घंटे से भी कम समय में मंडल स्तर तक पहुंचाने में सक्षम होंगे.

सिर्फ संदेश पहुंचाना ही इन सेंटरों का काम नहीं होगा. पार्टी की अलग-अलग यूनिट को दिए गए कार्यों की प्रगति पर नजर रखी जाएगी. किस यूनिट ने काम पूरा किया, कहां संगठन कमजोर है और किन जगहों पर अतिरिक्त हस्तक्षेप की जरूरत है.

राज्य इकाइयों को बायपास नहीं करेगा सिस्टम

कांग्रेस के इस नए मॉडल में केंद्रीय नेतृत्व को सीधे जमीनी स्तर से जोड़ने की कोशिश जरूर है, लेकिन राज्य इकाइयों को दरकिनार करने की योजना नहीं है. कनेक्ट सेंटर राज्य स्तर के संगठन के साथ समन्वय करते हुए काम करेंगे.

यानी मॉडल का उद्देश्य ‘दिल्ली बनाम प्रदेश’ जैसा कोई समानांतर सिस्टम खड़ा करना नहीं, बल्कि केंद्रीय नेतृत्व, प्रदेश संगठन और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच कम्युनिकेशन को तेज और व्यवस्थित करना है.

चुनाव के वक्त फिर बनेगा वॉर रूम

कनेक्ट सेंटर की एक खासियत यह होगी कि यह चुनाव खत्म होने के बाद बंद नहीं होगा. चुनावी अवधि में इन्हीं सेंटरों में अतिरिक्त मैनपावर जोड़ा जाएगा और इन्हें फिर से वॉर रूम की तरह इस्तेमाल किया जाएगा.

चुनाव खत्म होते ही अतिरिक्त चुनावी टीम हट जाएगी और कनेक्ट सेंटर अपने नियमित काम में लौट आएंगे. इस तरह कांग्रेस पहली बार चुनावी कम्युनिकेशन और सालभर के संगठनात्मक कम्युनिकेशन को एक ही ढांचे में जोड़ने की कोशिश कर रही है.

दिल्ली में होगा मुख्य कनेक्ट सेंटर

दिल्ली का कनेक्ट सेंटर इस पूरे नेटवर्क में सबसे अहम भूमिका निभाएगा. यह राज्य स्तर पर बनाए जा रहे सेंटरों के साथ समन्वय करेगा और केंद्रीय नेतृत्व तक जमीनी स्तर की रिपोर्ट और फीडबैक पहुंचाने का काम करेगा.

हालांकि तकनीक इस सिस्टम की रीढ़ होगी, लेकिन पार्टी सूत्रों के मुताबिक इसकी सफलता में ‘ह्यूमन इंटरफेस’ सबसे महत्वपूर्ण होगा. यानी डेटा सिर्फ इकट्ठा नहीं किया जाएगा, बल्कि कार्यकर्ताओं और संगठन के पदाधिकारियों से संवाद कर उसकी वास्तविक स्थिति समझने की कोशिश होगी.

कार्यक्रमों की रिपोर्ट और तस्वीरों का भी बनेगा रिकॉर्ड

कनेक्ट सेंटरों को पार्टी के लिए एक तरह के रिकॉर्ड सेंटर के रूप में भी विकसित किया जाएगा. राज्यों और जिला स्तर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की रिपोर्ट, गतिविधियों की जानकारी और तस्वीरें यहां रिकॉर्ड की जाएंगी.

इससे कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के पास पूरे देश में संगठन की गतिविधियों का एक व्यवस्थित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार हो सकेगा. भविष्य में इसी डेटा का इस्तेमाल संगठनात्मक रणनीति और प्रदर्शन के आकलन में किया जा सकता है.

खराब प्रदर्शन करने वाले पदाधिकारियों पर भी नजर

कनेक्ट सेंटरों का एक महत्वपूर्ण काम संगठन के अलग-अलग स्तरों पर मौजूद पदाधिकारियों के प्रदर्शन का लगातार विश्लेषण करना होगा.

यह व्यवस्था कांग्रेस के ‘संगठन सृजन अभियान’ से भी जुड़ी होगी. पार्टी यह देखना चाहती है कि अलग-अलग स्तरों पर नियुक्त पदाधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को कितनी प्रभावी ढंग से निभा रहे हैं.

ओडिशा में इस मॉडल की शुरुआती तस्वीर सामने आई है. कांग्रेस के एक संगठनात्मक दस्तावेज के मुताबिक, खराब प्रदर्शन करने वाले जिला अध्यक्षों को पत्र जारी करने की प्रक्रिया तय की गई थी. इससे साफ है कि पार्टी संगठनात्मक पदों पर नियुक्ति के साथ-साथ अब प्रदर्शन की निगरानी को भी ज्यादा महत्व देने की कोशिश कर रही है.

बूथ स्तर पर भी संगठन मजबूत करने की तैयारी

कांग्रेस का यह पूरा अभियान सिर्फ कम्युनिकेशन सिस्टम तक सीमित नहीं है. पार्टी बूथ स्तर पर अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए BLA यानी बूथ लेवल एजेंटों की नियुक्ति भी तेज कर रही है.

अब तक करीब 6.44 लाख BLA नियुक्त किए जा चुके हैं. हालांकि यह देश के कुल बूथों में लगभग 57 फीसदी कवरेज ही है. पार्टी की कोशिश साल के अंत तक सभी बूथों पर BLA नियुक्त करने की है.

यानी एक तरफ कांग्रेस केंद्रीय नेतृत्व और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच कम्युनिकेशन नेटवर्क मजबूत कर रही है, तो दूसरी तरफ बूथ स्तर पर संगठन की मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रही है.

क्या बदलेगा कांग्रेस के संगठन में?

कांग्रेस के इस नए मॉडल की असली परीक्षा इसके जमीन पर लागू होने के बाद होगी. कनेक्ट सेंटर अगर सिर्फ डेटा और रिपोर्ट इकट्ठा करने तक सीमित रहे, तो इसका असर सीमित रह सकता है. लेकिन अगर जमीनी फीडबैक के आधार पर संगठनात्मक फैसले लिए गए और कमजोर इकाइयों में समय रहते सुधार किया गया, तो यह पार्टी के कामकाज के तरीके में बड़ा बदलाव ला सकता है.

‘वॉर रूम’ जहां मुख्य रूप से चुनाव जीतने की रणनीति का केंद्र हुआ करता था, वहीं ‘कनेक्ट सेंटर’ को कांग्रेस सालभर संगठन चलाने, कार्यकर्ताओं से संवाद करने और प्रदर्शन की निगरानी करने वाले सिस्टम के रूप में विकसित करना चाहती है.

आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि क्या यह नया नेटवर्क कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व को बूथ स्तर तक प्रभावी ढंग से जोड़ पाता है और क्या लगातार मिलने वाला जमीनी फीडबैक पार्टी के संगठनात्मक फैसलों में वास्तविक बदलाव ला पाता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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