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‘Humans In The Loop’ फिल्म की दिल्ली के कला संकुल में स्क्रीनिंग, AI और मानवीय संवेदनाओं पर सार्थक चर्चा

Cinema and Society: नई दिल्ली में संस्कार भारती ने AI आधारित फिल्म Humans in the Loop का प्रदर्शन व परिचर्चा आयोजित की, जिसमें सिनेमा, संवेदना और तकनीक पर सार्थक संवाद हुआ.

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Vijay Ram Edited by Vijay Ram

नई दिल्ली, 28 जून. संस्कार भारती के कला संकुल द्वारा रविवार को कला संकुल, संस्कार भारती, 33 दीन दयाल उपाध्याय मार्ग, नई दिल्ली में फिल्म Humans in the Loop का प्रदर्शन एवं परिचर्चा आयोजित की गई. कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ. इस अवसर पर प्रसिद्ध अभिनेता श्रीकांत वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे.

फिल्म ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते प्रभाव, मानवीय संवेदनाओं तथा बदलते सामाजिक परिवेश जैसे विषयों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया. प्रदर्शन के दौरान दर्शकों ने फिल्म को गंभीरता से देखा और उसके संदेश को सराहा.

इसलिए बनाई गई यह फिल्‍म

फिल्म प्रदर्शन के पश्चात लेखक एवं निर्देशक अरण्य सहाय मुंबई से ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े. उन्होंने फिल्म की संकल्पना, निर्माण प्रक्रिया तथा इसके पीछे की सोच पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने दर्शकों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि यह फिल्म तकनीक के विकास के बीच मनुष्य की भूमिका और संवेदनशीलता को केंद्र में रखकर बनाई गई है.

विषयवस्तु और प्रस्तुति की सराहना

मुख्य अतिथि श्रीकांत वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि समाज में सार्थक परिवर्तन लाने के लिए ऐसी विचारप्रधान फिल्मों का निर्माण और उन पर खुला संवाद समय की आवश्यकता है. उन्होंने फिल्म की विषयवस्तु और प्रस्तुति की सराहना करते हुए इसे समकालीन दौर की महत्वपूर्ण सिनेमाई अभिव्यक्ति बताया.

परिचर्चा में उपस्थित दर्शकों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा फिल्म से जुड़े विभिन्न सामाजिक और मानवीय पक्षों पर अपने विचार रखे. कार्यक्रम का संचालन शशि प्रभा ने किया. अंत में दिल्ली प्रांत के फिल्म विधा संयोजक ध्रुव कर्णपाल ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं उपस्थित दर्शकों का आभार व्यक्त किया.

ये शख्सियतें रहीं मौजूद

आयोजन की सफलता में कला संकुल की पूरी टीम की सक्रिय भूमिका रही. दिग्विजय, राज उपाध्याय, श्याम कुमार, श्रुति सिन्हा, ऋतम्भरा, गरिमा रानी, श्राबोनी साहा, स्नेहा मुखर्जी, निशि, प्रदीप, विश्वदीप, मृत्युंजय, हर्षित तथा बिजेंद्र कुमार ने कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संचालित करते हुए इसे सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया. कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में संवाद, संवेदना और विचारों को नई दिशा देने का प्रभावशाली साधन भी है.



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