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सुप्रीम कोर्ट का आदेश, निजी अस्पतालों में शोषण रोकने के लिए सरकार नीति बनाए

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से निजी अस्पतालों में मरीजों के शोषण को रोकने के लिए नीति बनाने को कहा, ताकि मरीजों और उनके परिवारों के साथ हो रहे शोषण को रोका जा सके.

Telangana News, Supreme Court, OBC Reservation
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

Medical Infrastructure: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि वे निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों और उनके परिवारों के शोषण को रोकने के लिए एक प्रभावी नीति बनाए. यह आदेश कोर्ट ने उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि निजी अस्पतालों में मरीजों को अपनी फार्मेसी से अत्यधिक दामों पर दवाइयां और अन्य सामग्री खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है.

कोर्ट ने कहा कि यह स्थिति केवल मरीजों के लिए कठिनाई का कारण नहीं बनती, बल्कि उनके परिवारों को भी वित्तीय संकट में डाल देती है.

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकारों को इस शोषण को रोकने के लिए संवेदनशील होना चाहिए और इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाना चाहिए. हालांकि, अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि सरकारों को निजी अस्पतालों के खिलाफ सख्त और अनुचित कदम उठाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे निजी निवेशक हतोत्साहित हो सकते हैं, जो राज्य के चिकित्सा देखभाल में कमियों को पूरा कर रहे हैं.

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि राज्य सरकारें निजी अस्पतालों को नियंत्रित करें, जो मरीजों को अपनी फार्मेसी से ऊंचे दामों पर दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर करते हैं. याचिका में यह आरोप लगाया गया था कि निजी अस्पतालों में मरीजों को अस्पताल की फार्मेसी से ही दवाइयां और अन्य चिकित्सा सामग्री खरीदने के लिए दबाव डाला जाता है, जहां उनकी कीमतें बाजार मूल्य से कहीं अधिक होती हैं.

याचिकाकर्ता सिद्धार्थ डालमिया ने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने यह शोषण तब महसूस किया था, जब उनके रिश्तेदार का इलाज एक निजी अस्पताल में किया गया था. डालमिया ने कोर्ट से यह भी अनुरोध किया था कि निजी अस्पतालों को निर्देश दिया जाए कि वे मरीजों को अपनी फार्मेसी से दवाइयां खरीदने के लिए बाध्य न करें.



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