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धरती पर बढ़ेगा गर्मी का प्रकोप: अगले 5 साल टूट सकते हैं तापमान के सारे रिकॉर्ड, ‘अल नीनो’ लाएगा बड़ी तबाही?

CLIMATE ALERT: विश्व मौसम विज्ञान संगठन की चेतावनी, अगले 5 वर्षों में दुनिया का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचेगा. 2027 के सबसे गर्म वर्ष होने की 86% संभावना है.

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Vijay Ram Edited by Vijay Ram

ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) को लेकर दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने एक बार फिर बेहद डरावनी चेतावनी जारी की है. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और ब्रिटेन के मौसम विभाग की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अगले पांच वर्षों (2026 से 2030) के दौरान धरती का औसत तापमान अपने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ सकता है. इस बढ़ती गर्मी का सबसे खतरनाक असर उन इलाकों पर पड़ेगा जो पहले से ही बेहद गर्म हैं, वहां लोगों का रहना और पशुओं को पालना (घर-बाड़े संभालना) दूभर हो जाएगा. इसके अलावा, उत्तरी ध्रुव (आर्कटिक क्षेत्र) में तापमान बढ़ने की रफ्तार पूरी दुनिया के मुकाबले कहीं ज्यादा तेज रहने वाली है.

टूट सकते हैं गर्मी के पुराने सभी रिकॉर्ड

मौसम विभाग की इस नई रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2026 से 2030 के बीच दुनिया का औसत तापमान, औद्योगिक क्रांति की शुरुआत (1850-1900) के समय से 1.3 डिग्री सेल्सियस से लेकर 1.9 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा रह सकता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बात की 86 प्रतिशत (86%) संभावना है कि अगले पांच वर्षों में से कोई एक साल, इतिहास के सबसे गर्म साल यानी 2024 के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ देगा.

तापमान से जुड़े कुछ अनुमान और आंकड़े

वैज्ञानिकों ने इस रिपोर्ट में आने वाले सालों के लिए कुछ बेहद महत्वपूर्ण अनुमान लगाए हैं, जिन्हें इस प्रकार समझा जा सकता है:

संभावना / आंकड़े

  • नया रिकॉर्ड बनने की संभावना 86% चांस आने वाले पांच वर्षों में कोई एक साल 2024 से भी ज्यादा गर्म होगा.
  • 1.5 डिग्री की सीमा पार होना 91% चांस कम से कम एक साल तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5 डिग्री ऊपर जाएगा.
  • 2024 का पुराना रिकॉर्ड 1.55 डिग्री सेल्सियस अधिक पिछला साल अब तक के इतिहास में सबसे गर्म दर्ज किया गया था.
  • भविष्य का अनुमान (2026-2030) 1.3 से 1.9 डिग्री सेल्सियस अधिक धरती के औसत तापमान में इतनी बड़ी बढ़त देखने को मिल सकती है.

‘अल नीनो’ बढ़ाएगा धरती की मुसीबत

रिपोर्ट के मुख्य लेखक डॉ. लियोन हरमैनसन ने बताया कि इस भयानक गर्मी के पीछे ‘अल नीनो’ एक बड़ी वजह बनने जा रहा है. अनुमान है कि 2026 के अंत तक प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति दोबारा बेहद मजबूत हो जाएगी. इसके कारण साल 2027 और 2028 में दुनिया के कई हिस्सों में सूखा, अत्यधिक गर्मी और बिन मौसम भारी बारिश जैसी चरम मौसमी घटनाएं देखने को मिल सकती हैं. विशेष रूप से साल 2027 के इतिहास का सबसे गर्म साल बनने की उम्मीद बहुत ज्यादा है.

पेरिस समझौते के लक्ष्य को बड़ा झटका

दुनिया के देशों ने ‘पेरिस समझौते’ के तहत यह कसम खाई थी कि वे धरती के तापमान को 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखेंगे और हर संभव कोशिश करके इसे 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा के अंदर ही रोकेंगे. हालांकि, अगर अगले पांच सालों में तापमान 1.5 डिग्री से ऊपर जाता भी है, तो इसे तकनीकी रूप से पेरिस समझौते का सीधा उल्लंघन नहीं माना जाएगा, क्योंकि वह समझौता 20 सालों के लंबे औसत पर आधारित है. लेकिन वैज्ञानिकों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि तापमान इसी तरह बढ़ता रहा, तो खतरनाक चक्रवात, भयंकर बाढ़, और जंगलों की आग जैसी आपदाएं आम हो जाएंगी. इससे इंसानों और प्रकृति के लिए खुद को बचाए रखना बेहद मुश्किल हो जाएगा.



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