2 जी स्पेक्ट्रम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 2012 के 2 जी के लाइसेंस रद्द होने के बावजूद सेवाएं जारी रखने वाली कंपनियों को 2 फरवरी 2012 से से रिजर्व प्राइज का भुगतान करना होगा. जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने यह फैसला दिया है. कोर्ट ने TDSAT के फैसले को रद्द कर दिया है. TDSAT ने अपने फैसले में प्राइज का भुगतान 15 फरवरी 2023 से माना था.
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कोर्ट ने विशेष रूप से निर्देश दिया था कि जिन लाइसेंसधारियों ने 2 फरवरी 2012 के बाद अपना संचालन जारी रखा है, उन्हें रिजर्व प्राइज देना होगा. कोर्ट ने कहा कि दूरसंचार विभाग फरवरी 2013 के.आदेश के बावजूद नवंबर 2014 तक चुप बैठा रहा. कोर्ट ने कहा कि इतने लंबे समय तक मामले को लटकाए रखने के बावजूद डीओटी खुद को फायदा नही उठा सकता और उस अवधि के लिए प्रतिवादी पर ब्याज का बोझ नही डाल सकता. कोर्ट ने कहा कि कंपनी को मांग नोटिस मिलने के तीन महीने के भीतर शेष राशि का भुगतान करना होगा.
सुप्रीम कोर्ट ने सतर्कता आयोग को मामले की निगरानी का निर्देश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने 2 फरवरी 2012 को 11 कंपनियों के सभी 122 लाइसेंसों को अवैधानिक ठहराते हुए रद्द कर दिया था. स्पेक्ट्रम आवंटन में तत्कालीन वित्तमंत्री की भूमिका के सवाल पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत यह फैसला करने में सक्षम है कि उनकी भूमिका की जांच होनी चाहिए या नही. 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाला के मामले की सीबीआई जांच पर निगरानी के लिए विशेष जांच दल बनाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इसके लिए विशेष जांच दल की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्कता आयोग इसकी निगरानी करेगी.
वही पटियाला हाउस कोर्ट ने पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा सहित सभी को बरी कर दिया था. जिसके बाद ईडी ने हाई कोर्ट में अपील दायर कर सभी के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया था. जिसपर हाई कोर्ट में अभी भी सुनवाई चल रही है.
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-भारत एक्सप्रेस
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