सुप्रीम कोर्ट ने एसिड अटैक पीड़ितों को मुआवजे के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि यदि निजी अस्पताल एसिड अटैक पीड़ितों को सहायता देने से मना करते हैं, तो न्यायिक विधिक सेवा के अधिकारियों को जानकारी दे. कोर्ट ने नालसा से कहा कि वह यह सुनिश्चित करें कि एसिड अटैक पीड़ितों को समय पर मुआवजा मिले. मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य सरकारों द्वारा जवाब दाखिल नही करने पर नाराजगी जाहिर की गई है.
मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार, कर्नाटक सरकार, महाराष्ट्र सरकार, मध्य प्रदेश सहित 11 राज्यों की ओर से पेश वकील ने जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए समय की मांग की. कोर्ट चार सप्ताह बाद इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. जिसपर सीजेआई संजीव खन्ना ने कहा कि बहुत देर हो चुकी है, जल्द जवाब दाखिल करें. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि एसिड अटैक की शिकार चार साल की बच्ची को आज तक मुआवजा नही मिला है. इसके अलावे कई अन्य पीड़िताओं को भी मुआवजा नही मिला है.
राज्य सरकारों की लापरवाही पर नाराजगी
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि कई निजी अस्पताल एसिड अटैक पीड़ितों को ईलाज करने से मना कर रहे है. जिसपर सीजेआई खन्ना ने कहा कि अगर किसी पीड़िताओं को मुआवजा मिलने में देरी होती है, तो वे विधिक सेवा अधिकारियों से संपर्क कर सकते है. विधिक सेवा प्राधिकरण यह सुनिश्चित करेंगे कि पीड़ितों को निजी अस्पताल द्वारा उपचार से वंचित किया जाए.
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने दिशा निर्देश जारी करते हुए कहा था कि संबंधित राज्य सरकार एसिड अटैक पीड़ितों को उनके ईलाज और पुनर्वास के खर्च के लिए कम से कम तीन लाख रुपए की अनुग्रह राशि दे. कोर्ट ने यह भी कहा था कि इसमें से एक लाख रुपए हमले की जानकारी मिलने के 15 दिन के भीतर दे दिए जाएं. बाकी की 2 लाख रुपए संबद्ध राज्य सरकार या केंद्र सरकार घटना के दो माह के भीतर दे दे.
-भारत एक्सप्रेस
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