सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के तत्कालीन ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम और संजीव लाल को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है. जस्टिस एम. एम सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने यह आदेश दिया है.
जमानत मिली तो गवाह होंगे प्रभावित
मामले की सुनवाई के दौरान ईडी ने आलमगीर आलम का जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी काफी गंभीर है. लिहाजा जमानत पर रिहा करने का आदेश न दिया जाए. ईडी की ओर से पेश वकील ने ये भी कहा था कि मामले से संबंधित चारों की गवाहों की अभी तक दर्ज नहीं हो पाई है. लिहाजा जमानत याचिका खारिज किया जाए. क्योंकि अगर जमानत दी गई तो गवाहों को प्रभावित कर सकते है.
वहीं, आलमगीर आलम की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि उनकी उम्र 77 साल है. दो साल से अधिक समय से जेल में बंद है. मामले की सुनवाई में कई प्रगति नहीं हुई है.
एक साथ होगी सबकी सुनवाई
सरकार ने आलमगीर आलम के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए अभियोजन स्वीकृति भी नहीं दी गई है. ना ही गवाहों की जांच हुई है. ईडी ने तीन और पूरक आरोप पत्र दायर किया है. सभी की सुनवाई एक साथ होगी. इसमें कितना समय लगेगा यह पता नहीं है. इसलिए जमानत पर रिहा किया जाए. सभी पक्षों की जिरह के बाद कोर्ट ने जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है.
बयान दर्ज कराने के लिए 1 महिने का समय
सुप्रीम कोर्ट ने चारों गवाहों के बयान दर्ज करने के लिए एक महीने का समय दिया था. गवाहों में मुन्ना सिंह, संतोष कुमार उर्फ रिंकू, स्वर्णजीत सिंह गिल और बिंदेश्वर राम का नाम शामिल है. बता दें कि ईडी ने 6 मई 2024 को आलमगीर सहित अन्य के ठिकानों पर छापा मारा था. छापेमारी के दौरान आलमगीर आलम के यहां से 32.20 करोड़ रुपए कैश बरामद किया था. जबकि संजीव लाल के घर से 10.5 लाख रुपए बरामद किया गया था.
इसके अलावे एक डायरी भी बरामद किया गया था. झारखंड हाई कोर्ट ने 11 जुलाई 2025 को आलमगीर आलम की ओर से दायर जमानत याचिका को खारिज कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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