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कावेरी जल विवाद: तमिलनाडु की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 31 अगस्त को सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई सूर्यकांत की पीठ कावेरी जल विवाद में तमिलनाडु सरकार की याचिका पर 31 अगस्त 2026 को सुनवाई करेगी. कर्नाटक सरकार ने 1.64 लाख क्यूसेक पानी छोड़ने का दावा करते हुए याचिका को खारिज करने की मांग की है.

Supreme Court relief for Tamil Nadu

कावेरी नदी जल बंटवारे को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच चल रहे कानूनी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट आगामी 31 अगस्त 2026 को सुनवाई करेगा. भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय खंडपीठ तमिलनाडु सरकार की ओर से दायर उस याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें कर्नाटक सरकार पर तय कोटे का पानी न छोड़ने और आदेशों की अवहेलना करने का आरोप लगाया गया है.

पिछली सुनवाई: ‘कर्नाटक ने ज्यादा पानी छोड़ा

पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक सरकार से पूछा था कि क्या उसने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के आदेशों का विधिवत पालन किया है? सुनवाई के दौरान कर्नाटक सरकार ने पीठ को अवगत कराया था कि सुबह 8 बजे तक 12,607 क्यूसेक पानी छोड़ा जा चुका है. इस पर अदालत ने तमिलनाडु सरकार से कहा था कि कर्नाटक ने निर्धारित मात्रा से अधिक पानी छोड़ा है, इसलिए अब उन्हें कोई शिकायत नहीं होनी चाहिए. इसी दौरान कर्नाटक के वकील ने कोर्ट को यह भी जानकारी दी थी कि राज्य सरकार ने मेकेदातु (Mekedatu) में एक नया बांध बनाने का प्रस्ताव भी दिया है.

कर्नाटक का जवाब

कर्नाटक सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना आधिकारिक जवाब दाखिल कर तमिलनाडु सरकार और डीएमके (DMK) द्वारा दायर याचिकाओं का कड़ा विरोध किया है तथा इन्हें निरर्थक बताते हुए खारिज करने की मांग की है.

आंकड़े और तथ्य

  • CWMA का आदेश: प्राधिकरण ने 30 जुलाई को 15 दिनों तक रोजाना 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया था.
  • पानी छोड़ने का ब्योरा: 29 जुलाई से 10 अगस्त के बीच कर्नाटक के जलाशयों से कुल 1,64,080 क्यूसेक पानी छोड़ा गया.
  • बिलिगुंडलू गेजिंग स्टेशन: कर्नाटक के अनुसार, इसमें से 86,797 क्यूसेक पानी तमिलनाडु सीमा पर स्थित बिलिगुंडलू गेजिंग स्टेशन तक सफलतापूर्वक पहुंच चुका है.
  • सरकार का दावा है कि प्राधिकरण के निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन किया जा चुका है, इसलिए तमिलनाडु की मांग निराधार है.

तमिलनाडु और DMK की दलील

दूसरी ओर, तमिलनाडु सरकार और सत्तारूढ़ डीएमके की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि कर्नाटक ने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) और कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) के आदेशों का सही से पालन नहीं किया है.

याचिका में मांग की गई है कि

कर्नाटक को सीडब्ल्यूआरसी के 28 जुलाई 2026 के निर्देशों को तुरंत और पूर्ण रूप से लागू करने का आदेश दिया जाए. सीडब्ल्यूआरसी ने 28 जुलाई को अपनी 54वीं आपातकालीन बैठक में कावेरी बेसिन की हाइड्रोलॉजिकल और मौसमी परिस्थितियों का आकलन करने के बाद निर्देश दिया था कि कृष्ण राजा सागर (KRS) और काबिनी जलाशयों से पानी छोड़कर 29 जुलाई से 12 अगस्त 2026 तक बिलिगुंडलू में 3,500 क्यूसेक पानी का प्रवाह सुनिश्चित किया जाए.

रेत में दबकर अनोखा प्रदर्शन

कावेरी के पानी की मांग को लेकर तमिलनाडु के डेल्टा जिलों में किसानों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है. किसान नेता अय्या कन्नू के नेतृत्व में किसानों ने तिरुचिरापल्ली (त्रिची) में कावेरी नदी के किनारे रेत में खुद को गर्दन तक दबाकर अनोखा प्रदर्शन किया और पानी की तत्काल रिहाई की मांग की.

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2018 में तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और पुडुचेरी के बीच नदी जल बंटवारे के दशकों पुराने विवाद को सुलझाने व निगरानी के लिए कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) का गठन किया था. इस बोर्ड में बेसिन राज्यों के सदस्यों के अलावा केंद्र सरकार का एक नामित प्रतिनिधि (नॉमिनी) भी शामिल होता है.



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