सीजेआई बी. आर गवई ने एक मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि विष्णु प्रतिमा को लेकर उनके द्वारा दिए गए बयान को सोशल मीडिया पर गलत तरीके से पेश किया गया और सीजेआई ने कहा कि वे सभी धर्मों का सम्मान करते हैं. वही सुनवाई के दौरान मौजूद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सीजेआई के बयानों का समर्थन करते हुए कहा कि वह उन्हें पिछले 10 सालों से जानते है. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर एक्शन का रिएक्शन आम हो गई है.
जबकि वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने टिप्पणी करते हुए कहा कि वकील हर दिन ऐसी परिस्थितियों का सामना करते हैं और सिब्बल ने सोशल मीडिया को बेकाबू घोड़ा करार दिया. इसपर सीजेआई बी आर गवई ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नेपाल में भी ऐसा ही हुआ था और सीजेआई ने संकेत दिया कि अन्य देशों में भी न्यायपालिका और सार्वजनिक व्यक्तियों के बयानों को गलत ढंग से पेश किया जाता है.
सीजेआई बी आर गवई की टिप्पणी पर हुआ विवाद
बता दें कि 17 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट के वकील सत्यम सिंह राजपूत ने इसको लेकर सीजेआई को खुला पत्र लिखा है. उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि सीजेआई द्वारा की गई टिप्पणी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुचाने वाला है लिहाजा इसे वापस लिया जाए.
सीजेआई बी आर गवई ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा था कि आप भगवान विष्णु के परम भक्त हैं, तो जाइए और भगवान से ही प्रार्थना कीजिए कि वे कुछ करें. यह एक पुरातात्विक स्थल है और इसमें कोई भी बदलाव भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की अनुमति के बिना संभव नही है. क्षमा करें, हम इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकते. साथ ही पत्र में की गई टिप्पणी को लेकर स्पष्टीकरण जारी करने की मांग की गई है.
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-भारत एक्सप्रेस
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