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‘कानून का शासन ही आर्थिक विकास का आधार’: 11वें ब्रिक्स लीगल फोरम में बोले सीजेआई सूर्यकांत

CJI Surya Kant: सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका जैसी मजबूत संस्थाएं केवल आर्थिक विकास का परिणाम नहीं हैं, बल्कि वे देश की आर्थिक प्रगति की वास्तविक वास्तुकला हैं.

CJI Suryakant
Edited by Shubhra Rai

CJI Surya Kant: 11 वें ब्रिक्स लीगल फोरम में मजबूत संस्थाओं, कानून के शासन और आर्थिक विकास के बीच संबंधों को लेकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि न्याय वितरण प्रणाली जैसी मजबूत संस्थाएं केवल आर्थिक विकास के बाद खड़ा किया जाने वाला ढांचा नहीं है, बल्कि वे आर्थिक प्रगति की वास्तुकला हैं.

मजबूत और भरोसेमंद संस्थाए जरूरी

उन्होंने कहा कि कानून का शासन आर्थिक विकास के लिए तीन सबसे जरूरी स्तंभ प्रदान करता है: भरोसा, स्थिरता और पूर्वोनुमेयता. इसके बिना कोई भी उभरती अर्थव्यवस्था सुरक्षित नहीं रह सकती. सीजेआई ने कहा कि आज के दौर में किसी भी देश की आर्थिक मजबूती केवल प्राकृतिक संसाधनों या भौगोलिक स्थिति से तय नहीं होती, बल्कि इसके लिए मजबूत और भरोसेमंद संस्थाए जरूरी है. खासतौर पर न्यायपालिका और न्याय वितरण व्यवस्था निवेश, कारोबार और आर्थिक विकास के लिए भरोसे का माहौल तैयार करती है.

कानून और संस्थागत ढांचा बेहद अहम

सीजेआई ने अपने संबोधन में ब्रिक्स देशों की बढ़ती वैश्विक भूमिका का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इन देशों में दुनिया की 40 फीसदी से अधिक आबादी रहती है और ये खरीद क्षमता के आधार पर वैश्विक अर्थव्यवस्था का करीब 40 फीसदी हिस्सा रखते है. ऐसे में इन देशों के लिए मजबूत कानून और संस्थागत ढांचा बेहद अहम है. सीजेआई सूर्यकांत ने न्याय की अर्थव्यवस्था पर भी अपने विचार रखे.

उन्होंने कहा कि जब न्यायिक फैसलों में स्थिरता हो और लोगों को कानूनी व्यवस्था पर भरोसा हो तो लेन-देन की लागत कम होती है, बाजार में निष्पक्षता बढ़ती है और आर्थिक विकास को गति मिलती है.

दूसरे देश की अदालतें भी सीख सकें

सीजेआई ने कई महत्वपूर्ण फैसले का हवाला भी दिया है. उन्होंने कहा कि भारतीय न्यायपालिका ने अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता और दिवाला मामलों में स्पष्टता और तेजी लाने की दिशा में अहम भूमिका निभाई है. संबोधन में कहा गया है कि तकनीकी आधार पर वास्तविक समझौते और पक्षों की मंशा को कमजोर नहीं किया किया जाना चाहिए. सीजेआई ने ब्रिक्स देशों के बीच न्यायिक सहयोग बढ़ाने का सुझाव भी दिया है.

उन्होंने कहा कि शुरुआती कैरियर में जजों के लिए ब्रिक्स ज्यूडिशियल फेलोशिप शुरू की जाए और सदस्यों देशों के महत्वपूर्ण फैसलों का एक साझा डिजिटल ज्यूडिशियल रिपोजिटरी बनाया जाए, ताकि एक देश के फैसले से दूसरे देश की अदालतें भी सीख सकें.

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-भारत एक्सप्रेस



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