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दिल्ली एजुकेशन अधिनियम 2025 को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 2 फरवरी को होगी सुनवाई

दिल्ली स्कूल एजुकेशन अधिनियम 2025 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 2 फरवरी को सुनवाई करेगा. कोर्ट ने फीस को पिछली तारीख से लागू करने पर सवाल उठाते हुए इसे अव्यवहारिक बताया है.

Supreme Court on Delhi Education Act 2025
Edited by Vaibhav Gupta

दिल्ली एजुकेशन अधिनियम 2025 को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 2 फरवरी को सुनवाई करेगा. जस्टिस पी. एस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है.

मामले को सुलझाने के लिए एक और बैठक

मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस. वी राजू ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने उच्च अधिकारियों के साथ बैठक की और मामले को सुलझाने के लिए एक और बैठक की आवश्यकता है. एएसजी राजू ने कोर्ट से आग्रह किया कि मामले को शुक्रवार को सूचिबद्ध किया जाए. जिसके बाद कोर्ट ने सुनवाई में 2 फरवरी तक के लिए टाल दिया है.

पिछली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा था कि यह कानून संसद के बनाए दिल्ली स्कूल एडुकेशन एक्ट 1973 से टकराता है. नया कानून कहता है कि स्कूल खुद फीस तय नहीं करेंगे, सिर्फ प्रस्ताव देंगे. लेकिन 24 दिसंबर को जारी सर्कुलर इस कानून के खिलाफ है.

स्कूलों की बिगड़ सकती व्यवस्था

जारी अधिसूचना के मुताबिक 1 अप्रैल 2025 से शुरू हुए सत्र की फीस भी अब समिति तय करेगी, यानी पीछे की तारीख से लागू होगी, जो गलत है. जस्टिस नरसिम्हा ने कहा था कि कानून जनता के हित में है, फीस बहुत ज्यादा हो गई है. लेकिन जल्दबाजी में इसे लागू करने से स्कूलों की व्यवस्था बिगड़ सकती है. समिति बनाना ठीक है, लेकिन फीस को पीछे की तारीख से लागू करना सही नहीं लगता. आप 2025-26 के लिए फीस अभी से तय करना चाहते हैं, जबकि सत्र पहले ही शुरू हो चुका है, यह बहुत उलझा हुआ है.

वहीं, दिल्ली सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस. वी राजू ने कहा था इस साल के लिए एक बार की व्यवस्था है. जो फीस अभी ली जा रही है. वही प्रस्तावित मानी जाएगी. फिर समिति उसे मंजूरी देगी. सरकार चाहती है कि यह व्यवस्था इसी सत्र (2025-26) में लागू हो. इसपर जस्टिस नरसिम्हा ने कहा था कि अगर आप फीस पीछे से लागू करेंगे, तो स्कूलों से वसूली भी करनी पड़ेगी. यह अव्यवहारिक होगा. अच्छा कानून है, अच्छे उद्देश्य के लिए है, लेकिन इसे सही तरीके से लागू कीजिए.

क्या है मामला?

सुप्रीम कोर्ट दिल्ली के प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन की ओर से दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा है. दायर याचिका में दिल्ली सरकार द्वारा जारी अधिसूचना पर रोक लगाने की मांग की है. हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि कमेटियां पहले से तय 10 जनवरी के जगह 20 जनवरी तक बनाई जा सकती है.

साथ ही कोर्ट ने स्कूल मैनेजमेंट को फीस जमा करने की आखिरी तारीख 5 फरवरी तक बढ़ा दिया था. पहले यह काम 25 जनवरी तक करना था. दायर याचिका में दिल्ली स्कूल शिक्षा (फीस तय करने और रेगुलेशन में पारदर्शिता) अधिनियम 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है.

रेगुलेशन ऑफ फीस बिल 2025

दिल्ली सरकार ने राजधानी में निजी प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस बढोत्तरी को लगाम लगाने के लिए दिल्ली स्कूल एजुकेशन ट्रांसपेरेंसी इन फिक्सेशन एंड रेगुलेशन ऑफ फीस बिल 2025 लाया गया हैं. 1973 के दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम और नियमों के साथ-साथ लागू होगा.

सरकार द्वारा लाए गए यह कानून शिक्षा विभाग अधिनियम व नियमों में निर्धारित सभी प्रक्रियाओं जैसे स्कूलों से फीस प्रस्तावों की जांच, अनुमतियां, रिपोर्टिंग और निगरानी को लागू करना शुरू करेगा. नए कानून में फीस निर्धारण और संशोधन की प्रक्रिया में अभिभवकों की अनिवार्य भागीदारी, स्कूलों द्वारा वित्तीय विवरण, खर्च, निधि उपयोग और फीस संरचना का अनिवार्य एवं सार्वजनिक खुलासा, स्पष्ट और मजबूत शिकायत नियंत्रण तंत्र, किसी भी अनधिकृत या अवैध फीस में बढ़ोतरी पर तुरंत कार्रवाई, फीस वृद्धि से पहले विस्तृत प्रक्रिया और सरकार की पूर्व स्वीकृति आवश्यक जैसी प्रमुख बातों को इसमें शामिल किया गया है.

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-भारत एक्सप्रेस



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