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उज्जैन महाकाल मंदिर में वीआईपी दर्शन पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

उज्जैन के महाकाल मंदिर में वीआईपी दर्शन को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि मंदिरों की व्यवस्थाएं तय करना कोर्ट का काम नहीं है. अदालत ने याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाने की सलाह दी.

Mahakal Temple Ujjain
Edited by Vaibhav Gupta

उज्जैन का महाकाल मंदिर में प्रवेश को लेकर दायर याचिका का सुप्रीम कोर्ट ने निपटारा कर दिया है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाने की सलाह दी है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह आदेश दिया है.

इसपर और कोई टिप्पणी नहीं

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील विष्णु शंकर जैन को फटकार लगाते हुए कहा कि “ऐसी याचिकाएं दाखिल नहीं की जानी चाहिए.” श्रद्धालु इस तरह की याचिकाएं दायर नहीं करते, हम इसपर और कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते.

कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि मंदिरों के संचालन और व्यवस्थाओं को विनियमित करना न्यायालय का काम नहीं है. मंदिर का संचालन करने वालों को ही यह तय करने दिया जाना चाहिए. दायर याचिका में कहा गया था कि ताकतवर और प्रभावशाली लोगों को बिना किसी रोकटोक के गर्भगृह में जाने दिया जा रहा है. जबकि हर साल लाखों लोग महाकाल के गर्भगृह में प्रवेश नही दिया जाता है.

गर्भगृह में प्रवेश की एक एकीकृत नीति

मामले की सुनवाई के दौरान इंदौर के रहने वाले वकील चर्चिल शास्त्री की ओर से पेश वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि गर्भगृह में प्रवेश की एक एकीकृत नीति होनी चाहिए. ये वीआईपी व्यवस्था या किसी को हां और किसी को ना नहीं होना चाहिए. यह भेदभाव है.

इसपर सीजेआई ने कहा कि यह सब तय करना कोर्ट का काम नही है. सीजेआई ने कहा कि आप सक्षम प्राधिकार के समक्ष जाइए. दायर याचिका में कहा गया था कि गर्भ गृह में जाने से भक्तों को रोकना समानता के अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ है. याचिका में कहा गया था कि सभी भक्तों के लिए एक जैसी व्यवस्था लागू करने की बात कही गई हैं.

श्रद्धालुओं का प्रवेश अस्थायी रूप से बंद

बता दें कि 4 जुलाई 2023 को श्रावण मास के दौरान भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए महाकाल मंदिर प्रबंधन समिति ने गर्भगृह में आम श्रद्धालुओं का प्रवेश अस्थायी रूप से बंद कर दिया था. उस समय यह कहा गया था कि सावन खत्म होने होते ही व्यवस्था को फिर से शुरू कर दिया जाएगा.

हालांकि डेढ़ साल बाद भी अभी तक गर्भगृह आम भक्तों के लिए नहीं खोला गया है. वर्तमान स्थिति यह है कि श्रद्धालुओं को गणेश मंडपम, कार्तिकेय मंडपम और नंदी हॉल से ही दर्शन करने पड़े रहे हैं.

ये भी पढ़ें: आतिशी और अरविंद केजरीवाल को मानहानि के मामले में सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत बरकरार

-भारत एक्सप्रेस



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