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70 वर्षीय रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर को दिल्ली हाई कोर्ट से बलात्कर मामले में राहत, दर्ज एफआईआर को किया रद्द

दिल्ली हाई कोर्ट से लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) इंद्रजीत सिंह को बड़ी राहत मिल गई है. कोर्ट ने 70 वर्षीय सेवानिवृत्त भारतीय सेना अधिकारी के खिलाफ दर्ज बलात्कार और यौन उत्पीड़न के तहत दर्ज मामले को खारिज कर दिया है.

delhi high court
Edited by Vaibhav Gupta

दिल्ली हाई कोर्ट से लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) इंद्रजीत सिंह को बड़ी राहत मिल गई है. कोर्ट ने 70 वर्षीय सेवानिवृत्त भारतीय सेना अधिकारी के खिलाफ दर्ज बलात्कार और यौन उत्पीड़न के तहत दर्ज मामले को खारिज कर दिया है.

जस्टिस अमित महाजन ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप गलत और बेतुका है. कोर्ट ने कहा कि इस तरह की कार्यवाही को जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा. इन सभी तथ्यों को देखते हुए, दिल्ली हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का आदेश और उसके आधार पर दर्ज एफआईआर को भी खारिज करने का आदेश दिया है.

मेडिकल परीक्षण में कोई चोट नहीं

कोर्ट ने कहा कि इससे संबंधित कोई भी ऐसा विश्वसनीय सबूत पेश नहीं किया गया, जिससे आरोप साबित होता हो. कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि आरोपी को मुकदमे की कठिनाइयों से गुजरने के लिए मजबूर करना न्याय का मखौल होगा. कोर्ट ने कहा कि महिला के मेडिकल परीक्षण में कोई चोट दर्ज नहीं थी. शिकायतकर्ता द्वारा दिए गए वीडियों फुटेज में न तो किसी चोट के निशान दिखे और न ही फटे कपड़े नजर आए.

कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि 70 साल के एक बुजुर्ग व्यक्ति द्वारा पार्क में लोगों की मौजूदगी में ऐसा हमला करना न केवल असंभव है, बल्कि हास्यास्पद लगता है. कोर्ट ने यह आदेश लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) इंद्रजीत सिंह की ओर से दायर याचिका पर यह आदेश दिया है. इंद्रजीत सिंह ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें दिल्ली पुलिस को उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था.

शिकायत की गहनता से हो समीक्षा

कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि मजिस्ट्रेट को एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने से पहले संबंधित डीसीपी की रिपोर्ट पर गंभीरता से विचार करना चाहिए था. कोर्ट ने कहा कि दायर रिपोर्ट में आरोपों पर संदेह जताया गया था, लेकिन मजिस्ट्रेट ने इसे नजरअंदाज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि झूठे और निराधार मामलों का असर व्यक्ति की सामाजिक प्रतिष्ठा पर गहरा पड़ता है. इसलिए अदालत का दायित्व है कि वह शिकायत की गहनता से समीक्षा करें, खासकर तब जब मामला स्पष्ट रूप से प्रताड़ना के उद्देश्य से दायर किया गया हो. शिकायतकर्ता महिला ने धारा 376, 511, 307, 320, 323, 339,354,354A, 354B, 355, 503, 506 और 509 के तहत मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है. ये दोनों पड़ोसी है.

महिला ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2020 में जब वह घर लौट रही थी, तभी पार्क में सिंह ने उसे घेर लिया और उसके साथ छेड़छाड़ की, उसके कपड़े फाड़े और बलात्कार का प्रयास किया.

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-भारतए एक्सप्रेस



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