दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस तारा वितास्ता गंजू उस वक्त भावुक हो गई जब उनकी विदाई समारोह में बेटी रोने लगी. जिसको देखकर जस्टिस तारा वितास्ता गंजू भी बेटी को रोते देख रोने लगी. इसपर जस्टिस गंजू ने बेटी को दिलासा देने के लिए मुस्कराते हुए कहा अगर तुम रोओगी, तो मैं भी रो दूंगी.
देर रात तक काम करने की हुई आलोचना
जस्टिस गंजू ने आगे कहा कि अचानक ट्रांसफर के चलते उनका पूरा परिवार शामिल नहीं हो पाया. जस्टिस गंजू का ट्रांसफर कर्नाटक हाई कोर्ट में किया गया है. जस्टिस गंजू ने विदाई समारोह के दौरान कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट ने कानून और न्याय के बारे में उनकी समझ को आकार दिया है. उन्होंने कहा कि कई बार देर रात तक काम करने के कारण उनकी आलोचना भी हुई है.
उन्होंने कहा कि मैंने कभी भी मेहनत को गलती नही माना. उन्होंने कहा कि न्याय की जरूरतें हमेशा घड़ी के हिसाब से नही चलती है, हमारी पहली डियूटी देश और उन लोगों के प्रति होनी चाहिए जो हमसे मदद मांगते है.
कोर्ट ने कानून व निष्पक्षता सिखाया
जस्टिस गंजू ने कहा कि सच कहूं तो, इस कोर्ट ने मुझे कानून, निष्पक्षता और गहरी जिम्मेदारी के बारे में वह सब कुछ सिखाया है, जो मैं जानती हूं. यह मेरा सबसे बड़ा गुरु रहा हैं. यहां बिताए गए साल मेरी न्यायिक यात्रा के सबसे संतोषजनक सालों में से रहे हैं. एक ऐसी यात्रा जिसे मैं इसी भावना और इसी लगन के साथ जारी रखने की उम्मीद करती हूं.
न्यायाधीश गंजू ने कहा कि अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट की अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट की जज रूथ बेडर गिन्सबर्ग ने उन चीजों के लिए लड़ने के लिए प्रेरित किया जिनकी आप परवाह करते हैं, लेकिन इसे इस तरह से करें कि अन्य लोग भी आपके साथ जुड़े. दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन की महिला वकीलों और वरिष्ठ वकील विकास पाहवा सहित विभिन्न बार के सदस्यों ने सीजेआई बी आर गवई को पत्र लिखकर जस्टिस गंजू के स्थानांतरण पर अपना विरोध जताया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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