केजरीवाल
नई दिल्ली: दिल्ली शराब नीति मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को सोमवार को हाईकोर्ट से दोहरा झटका लगा. जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने न केवल इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने (Recusal) की याचिका खारिज कर दी, बल्कि याचिकाकर्ताओं की मंशा पर भी गंभीर सवाल उठाए. केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने अर्जी दाखिल कर मांग की थी कि जस्टिस शर्मा इस केस की सुनवाई न करें.
फैसले के समय कोर्ट रूम में सन्नाटा छा गया. जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने बेहद भावुक और सख्त लहजे में कहा, “एक न्यायाधीश के रूप में मेरी चुप्पी की परीक्षा ली जा रही थी. आसान रास्ता यह होता कि मैं बिना दलील सुने खुद को अलग कर लेती, लेकिन यह संस्था की निष्पक्षता का सवाल था.” उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी पक्षकार अपनी पसंद की बेंच चुनने के लिए जज पर दबाव नहीं बना सकता.
कोर्ट ने जजों के परिवार पर उठाए गए सवालों पर कड़ा ऐतराज जताया. जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा, “अगर राजनेताओं के बच्चे राजनीति में आ सकते हैं, तो जजों के बच्चे कानून के पेशे में क्यों नहीं आ सकते? मेरे बच्चों का एक्साइज पॉलिसी केस से कोई लेना-देना नहीं है. जब तक पद के दुरुपयोग का कोई सबूत न हो, तब तक ऐसे आरोप लगाना जजों के परिवार के मौलिक अधिकारों का हनन है.”
कोर्ट ने अंत में कहा कि अनुमानों के आधार पर ऐसी मांगें मानना एक गलत मिसाल कायम करेगा. अब सीबीआई की याचिका पर अगली सुनवाई 29 अप्रैल को होगी.
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