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Money Laundering: अनिल अंबानी ग्रुप से जुड़े अमिताभ झुनझुनवाला और अमित बापना को अदालत से झटका, 2 मई तक भेजे गए जेल

Amitabh Jhunjhunwala Amit bapna Arrest Update: रिलायंस ग्रुप के पूर्व अधिकारी झुनझुनवाला और अमित बापना 2 मई तक जेल भेजे गए. मनी लॉन्ड्रिंग और LIC से धोखाधड़ी मामले में घिरे हैं अनिल अंबानी.

The Rouse Avenue Court delhi

राजधानी दिल्ली स्थित राऊज एवेन्यू कोर्ट

Vijay Ram Edited by Vijay Ram

दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (ADAG) से जुड़े रहे अमिताभ झुनझुनवाला और अमित बापना को 2 मई तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) की पांच दिनों की रिमांड खत्म होने के बाद दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया था. इन दोनों को रिलायंस होम फाइनेंस (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस (RCFL) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया गया है.

क्या है ईडी का आरोप?

ईडी के मुताबिक, अमिताभ झुनझुनवाला और अमित बापना ने अपराध की कमाई (Proceeds of Crime) को छिपाने और उसे वैध दिखाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. यह मामला सीबीआई की उस एफआईआर पर आधारित है, जिसमें भ्रष्टाचार और पैसों की हेराफेरी के आरोप लगाए गए थे. झुनझुनवाला लंबे समय तक रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के निदेशक रहे थे, जो इस पूरे मामले के केंद्र में मौजूद कंपनियों की होल्डिंग कंपनी है.

रिलायंस ग्रुप ने झाड़ा पल्ला

मामला बढ़ने के बाद रिलायंस एडीए ग्रुप ने एक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि इन दोनों अधिकारियों का पिछले सात सालों से ग्रुप के साथ कोई संबंध नहीं है. ग्रुप के मुताबिक, अमिताभ झुनझुनवाला ने सितंबर 2019 में और अमित बापना ने दिसंबर 2019 में ही रिलायंस ग्रुप छोड़ दिया था. ग्रुप ने साफ किया कि वर्तमान में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर या रिलायंस पावर जैसी कंपनियों के साथ इनका कोई लेना-देना नहीं है.

एलआईसी को 3750 करोड़ का चूना

इसी महीने सीबीआई ने अनिल अंबानी और रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) के खिलाफ एक और मामला दर्ज किया है. आरोप है कि एलआईसी को करीब 3750 करोड़ रुपये का भारी नुकसान पहुंचाया गया है. जांच में सामने आया है कि आरकॉम के प्रबंधन ने कंपनी की माली हालत के बारे में झूठे दावे किए और एलआईसी को गलत जानकारी देकर 4500 करोड़ रुपये के डिबेंचर खरीदने के लिए उकसाया. ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, बैंकों और वित्तीय संस्थानों से जुटाए गए फंड का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया है.



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