दिल्ली हाई कोर्ट ने केजरीवाल सहित अन्य के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर केजरीवाल सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. साथ ही कोर्ट ने केजरीवाल की उस दलील को सोशल मीडिया से हटाने का आदेश दिया है, जिन्होंने शराब नीति मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को खुद से हटने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान दी गई दलील और कोर्ट की कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग हटाने का आदेश दिया है.
जस्टिस वी कामेश्वर राव और जस्टिस मनमीत अरोड़ा की पीठ ने यह नोटिस जारी किया है.
6 जुलाई को होगी मामले की अगली सुनवाई
कोर्ट ने MEITY, केंद्र सरकार को भी नोटिस जारी किया है. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि ऐसी पोस्ट वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियमों का उल्लंघन करती हैं और उन्हें सोशल मीडिया पर अनुमति नहीं दी जा सकती. वही फेसबुक ने अदालत को सूचित किया कि रजिस्ट्रार जनरल के पत्र के बाद उसने अपने प्लेटफार्म से 13 अप्रैल की अदालती कार्यवाही से संबंधित सभी वीडियो हटा दिए हैं. कोर्ट 6 जुलाई को मामले में अगली सुनवाई करेगा. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील दिग्विजय सिंह ने इसे सोशल मीडिया पर अपलोड किया है. अन्य लोगों ने भी इसे अपलोड किया है. ये पोस्ट अदालती कार्यवाही को बदनाम करने के लिए किया गया है.
याचिकाकर्ता के वकील ने यह भी कहा कि वीसी नियम अदालती कार्यवाही की रिकॉर्डिंग को तब तक प्रतिबंधित करते हैं, जब तक कि अदालत द्वारा स्पष्ट रूप से इसकी अनुमति न दी गई हो. उन्होंने यह भी कहा कि 13 अप्रैल की कार्यवाही के केवल उन हिस्सों को साझा किया गया है, जो राजनीतिक एजेंडे को पूरा करता है. यह एक बड़ी साजिश का हिस्सा है.
जनहित याचिका में कोर्ट की कार्यवाही लीक करने का आरोप
दाखिल जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि जब अरविंद केजरीवाल जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के समक्ष रिक्यूजल एप्लिकेशन पर अपनी दलील रख रहे थे, तो सोशल मीडिया पर कोर्ट की कार्यवाही की रिकॉर्डिंग को जान बूझकर और सोची समझी रणनीति के तहत दिल्ली हाई कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियमों का उल्लंघन करते हुए पब्लिश किया गया है. जिसे केजरीवाल और पत्रकार के अलावा, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, संजीव झा, पुरनदीप साहनी, जरनैल सिंह, मुकेश अहलावत और विनय मिश्रा के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है. साथ ही विडियो को सोशल मीडिया से हटाने की मांग की गई है.
बता दें कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने इस केस से खुद को अलग करने से इनकार कर दिया था. साथ ही केजरीवाल के सभी दलीलों का अपने फैसले में जिक्र किया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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