दिल्ली हाईकोर्ट.
Minor Girl Rape case: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि कानून के तहत नाबालिग से विवाह अमान्य है और इसे बलात्कार जैसे अपराध को छिपाने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. कोर्ट (Delhi High Court) ने यह टिप्पणी एक 32 वर्षीय व्यक्ति की जमानत याचिका को खारिज करते हुए की, जिसने 16 वर्षीय नाबालिग लड़की से शादी का दावा करते हुए जमानत मांगी थी. जस्टिस संजीव नरूला ने स्पष्ट किया कि नाबालिग की शारीरिक सहमति भी कानूनी रूप से मान्य नहीं है.
मामले की पृष्ठभूमि
आरोपी पर नाबालिग के साथ यौन शोषण और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत मामला दर्ज किया गया था. पीड़िता ने कई बार यौन उत्पीड़न के बाद आत्महत्या कर ली थी. मृतका की बहन ने बताया कि आरोपी ने उसकी बहन को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए. पीड़िता लगभग दो महीने की गर्भवती थी और आरोपी के दुर्व्यवहार के कारण उसने अपनी जान दे दी.
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा- नाबालिग से विवाह अमान्य है. बलात्कार के अपराध को छिपाने के लिए इसका उपयोग नहीं हो सकता. आरोपी की जमानत याचिका खारिज, पीड़िता ने आत्महत्या की थी.
कोर्ट का कड़ा रुख
हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि आरोपी और पीड़िता की उम्र में बड़ा अंतर था, जो शोषण और अनुचित प्रभाव को दर्शाता है. कोर्ट ने उल्लेख किया कि पीड़िता आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर थी, जिसके कारण वह और भी असुरक्षित थी. जस्टिस नरूला ने कहा कि उम्र का यह अंतर केवल संख्यात्मक नहीं, बल्कि शक्ति के असंतुलन को भी उजागर करता है, जो सहमति की किसी भी धारणा को अमान्य करता है. कोर्ट ने इस मामले में सख्त रवैया अपनाते हुए कहा कि ऐसे गंभीर अपराधों में जमानत नहीं दी जा सकती. यह फैसला नाबालिगों के संरक्षण और उनके खिलाफ होने वाले शोषण को रोकने के लिए कानून की सख्ती को दर्शाता है.
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