दिल्ली हाई कोर्ट ने रहस्यमय स्थिति में पत्नी की मौत के मामले में गिरफ्तारी के डर से अदालत की शरण में गए व्यक्ति को राहत देने के इनकार कर दिया है. आरोपी ने कोर्ट से अग्रिम जमानत की गुहार लगाई थी. उसके खिलाफ उसके सास ससुर ने क्रूरता सहित अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज करा रखा है.
जस्टिस प्रतिबा मनिंदर सिंह और जस्टिस रजनीश कुमार गुप्ता की बेंच ने कहा कि इस मामले में नियमित बेंच के सुनवाई करने की जरूरत है, क्योंकि उसमें कई मुद्दे हैं. अवकाशकालीन बेंच इस पर सुनवाई नहीं कर सकती है. यह याचिका पंकज लांबा नामक व्यक्ति ने दायर की थी. कोर्ट 15 जुलाई को इस मामले में सुनवाई करेगा.
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अगर उसे इस बीच गिरफ्तार किया जाता है कि यह उचित अदालत के समक्ष अपनी बात को रख सकता है. मजिस्ट्रेट की अदालत ने 1 मई को उसे भगोड़ा अपराधी घोषित कर दिया था. आरोपी लांबा ने पालम विहार थाने में दर्ज मामले में गिरफ्तारी की आशंका जताई थी और राहत की मांग की थी.
लांबा के खिलाफ 3 दिसंबर 2024 को भारतीय दंड.संहिता की धारा 498 A (विवाहिता के.साथ क्रूरता), धारा 406 (विश्वासघात) और धारा 34 (साझा.मंशा)के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है. आरोपों के अनुसार उनकी पत्नी हर्षिता ब्रेला की ब्रिटेन में रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई थी. ब्रेला का शव 14 नवंबर 2024 को पूर्वी लंदन में एक कार से बरामद किया गया था. यह कार उसके पति की थी जो ईलफोर्ड के ब्रिसबेन रोड़ में खड़ी थी. लांबा के पिता दर्शन सिंह व माता सुनील देवी को.इस साल 18 मार्च को गिरफ्तार किया गया था.
ब्रेला के परिवार ने आरोप लगाया है कि यह एक सुनियोजित हत्या थी, क्योंकि लांबा पत्नी की बेरहमी से हत्या करने के एक दिन बाद ही भारत भागने में सफल रहा था. ब्रेला के परिवार ने 19 नवंबर 2024 को थाने में.शिकायत दर्ज कराई थी और 3 दिसंबर की उसके पति और ससुराल के अन्य.सदस्यों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था.
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