दिल्ली हाई कोर्ट ने हिजबुल मुजाहिदीन के मुखिया सैयद सलाहुद्दीन के दो बेटों सहित अन्य की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया है. टेरर फंडिंग मामले में निचली अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने के खिलाफ अपील दायर की गई थी. जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस मनोज जैन की पीठ ने अपीलों को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि दायर अपील सुनवाई योग्य नही है.
यूएपीए की गंभीर धाराओं में फंसा यूसुफ
यूसुफ पर जम्मू कश्मीर में आतंकी अभियानों के लिए पाकिस्तान से पैसा इकठ्ठा करने का आरोप था और 2019 में इस मामले में उसके और अन्य 18 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी. एनआईए ने गैर-कानूनी गतिविधियां निरोधक कानून (यूएपीए) की विभिन्न धाराओं 13 (गैर कानूनी गतिविधियों के लिए सजा), 17 (आतंकवादी गतिविधि के लिए धन जुटाने के लिए सजा), 18 (साजिश रचने के लिए सजा), 20 ( आतंकवादी गिरोह या संगठन का सदस्य होने के लिए सजा), 38 (एक आतंकवादी संगठन की सदस्यता) और 39 (एक आतंकवादी संगठन को समर्थन देने) के तहत आरोप पत्र दायर किया है.
हवाला के जरिए घाटी में आतंक का खेल
सलाहुद्दीन के बेटे शाहिद यूसुफ को अक्टूबर 2017 में गिरफ्तार किया गया था. वहीं उसके दूसरे बेटे सैयद अहमद शकील को एनआईए ने 30 अगस्त 2018 को और श्री नगर में उसके घर से 2011 में टेरर फंडिंग के मामले में गिरफ्तार किया गया था.
एनआईए के अनुसार यह मामला पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादियों द्वारा हवाला चैनलों के माध्यम से जम्मू कश्मीर में धन हस्तांतरण से संबंधित है और इसकी साजिश भारत में मौजूद कुछ लोगों के साथ मिलकर रची गई जिसके उद्देश्य जम्मू कश्मीर में अलगाववादी और आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देना और वित्त पोषित करना था. सलाहुद्दीन को जून 2017 में अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी घोषित किया गया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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