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दिल्ली हाईकोर्ट ने अवमानना कार्यवाही की एक वर्ष की समयसीमा को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की

दिल्ली हाई कोर्ट ने अदालत की अवमानना अधिनियम की धारा 20 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता चुनौती के लिए आवश्यक संवैधानिक आधार पेश करने में विफल रहा.

दिल्ली हाईकोर्ट

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दिल्ली हाईकोर्ट ने अदालत की अवमानना कार्यवाही शुरू करने के एक वर्ष की सीमा अवधि की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता अदालत की अवमानना अधिनियम की धारा 20 की विश्वनीयता को चुनौती देने में विफल रहा हैं.

धारा 20 के अनुसार कोई भी अदालत की अवमानना की कार्यवाही कथित अवमानना की तिथि से एक वर्ष की अवधि समाप्त होने के बाद शुरू नहीं कि जा सकती है. अदालत ने कहा कि इस मामले में पेश की गई दलीलें नोटिस जारी करने के लिए उपयुक्त नही है. हमें वर्तमान याचिका पर विचार करने का कोई भी कारण नहीं मिला और इसे बिना किसी लागत के खारिज किया जाता है.

यह याचिका केंद्र सरकार में कार्यरत अवर सचिव राजेश रंजन ने दाखिल की थी. वे केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के उस फैसले से व्यथित थे, जिसमें सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा (एलडीसीई) के माध्यम से पद्दोन्नति में वरिष्टता सूची को फिर से निर्धारित करने का आदेश दिया गया था. जब सरकार ने कैट के आदेश का पालन नहीं किया तो अवमानना याचिका दायर की गई थी. कैट ने उसपर नोटिस जारी किया था. इसके बाद नई वरिष्ठम सूची जारी की गई थी.

सरकार को पत्र और हाई कोर्ट की याचिका

इस बीच याचिकाकर्ता ने अदालत की अवमानना अधिनियम की धारा 20 को वापस लेने के लिए सरकार को पत्र लिखा. जब उन्हें कोई जवाब नहीं मिला तो उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल किया था. कोर्ट ने मामले पर विचार करने के बाद पाया कि उनकी मुख्य शिकायत इस निराधार आरोप से उपजी है कि कैट के समक्ष अवमानना याचिका समय सीमा समाप्त होने के बावजूद कैट ने इसे स्वीकार कर लिया और आदेश पारित किया.

कोर्ट ने कहा कि ऐसा एक भी आधार नहीं है जो उसे अपील करें या हमें नोटिस जारी करने के लिए प्रेरित करे, क्योंकि चुनौती के आधार किसी अधिनियम या कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसलों में निर्धारित मापदंडों के अंतर्गत नहीं आते हैं. इसलिए इसे खारिज किया जाता है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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