दिल्ली हाई कोर्ट टेरर फंडिंग (Terror Funding Case) मामले में आरोपी और सांसद राशिद इंजीनियर की ओर से दायर याचिका पर 14 जनवरी को सुनवाई करेगा. जस्टिस रविन्द्र दुडेजा की पीठ मामले में सुनवाई कर रही है. मामले की सुनवाई के दौरान राशिद इंजीनियर की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हरिहरन ने कहा कि अगला संसद सत्र एक दिसंबर से शुरू हो रहा हैं, इसलिए मामले में जल्द सुनवाई कर ली जाए.
बड़ी पीठ के पास जा सकता है मामला
कोर्ट ने कहा कि कौन सा मामला आवश्यक नही है? पूरा दिसंबर भरा हुआ हैं. हरिहरन ने कोर्ट को बताया कि पिछले आदेश के मुताबिक यात्रा खर्च उन्हें स्वयं वहन करना होगा, लेकिन अब इसको लेकर विभाजित फैसला दिया हैं. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि एक जज ने कहा था कि ऐसी कोई अधिकारसिद्ध मांग नहीं है.
वहीं एनआईए की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा अगर जरूरी हुआ तो मामला बड़ी पीठ के पास भेजा जा सकता है. कोर्ट ने कहा कि बीएनएसएस की धारा 433 के तहत पीठ तय करेगी कि मामले को बड़ी पीठ के पास भेजा जाए या नहीं. इससे पहले जस्टिस अनूप जे भंभानी ने राशिद इंजीनियर की याचिका को स्वीकार किया है, वहीं जस्टिस विवेक चौधरी ने इसे खारिज के दिया है. राशिद इंजीनियर ने तिहाड़ जेल से संसद तक कि यात्रा का खर्च वहन करने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की थी.
हमारे विचार आपस में भिन्न
कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि हम इस बात पर सहमति नहीं बना सके कि याचिका को किस तरह निपटाया जाए. हमारे विचार आपस में भिन्न हैं. मामले की सुनवाई के दौरान राशिद इंजीनियर की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हरिहरन ने कोर्ट को बताया था कि कस्टडी पैरोल में होने वाले 17 लाख रुपए खर्च इंजीनियर को ही वहन करने के लिए कहा गया है.
राशिद इंजीनियर ने 2024 के लोकसभा चुनाव में बारामूला सीट पर जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला को हराया था. राशिद इंजीनियर शेख अब्दुल रशीद के नाम से भी जाना जाता है. वह 2017 के आतंकवादी वित्तपोषण (आतंकी फंडिंग) मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत एनआईए (NIA) द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद से रशीद 2019 से जेल में बंद है.
आरोप करें तय- कोर्ट
बता दें कि कश्मीरी कारोबारी जहूर वटाली से पूछताछ के दौरान पूर्व विधायक शेख अब्दुल राशिद का नाम सामने आया था. एनआईए ने कश्मीर घाटी में आतंकवादी समूहों और अलगाववादियों को फंड देने के आरोप में वटाली को गिरफ्तार किया था. पटियाला हाउस कोर्ट ने 16 मार्च 2022 को हाफिज सईद, सैयद सलाहुद्दीन, यासीन मलिक, शब्बीर शाह और मसरत आलम, राशिद इंजीनियर, जहूर अहमद वताली, बिट्टा कराटे, आफताब बट्ट उर्फ पीर सैफुल्ला के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था.
एनआईए के मुताबिक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के सहयोग से लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन, जेकेएलएफ, जैश-ए- मोहम्मद जैसे संगठनों ने जम्मू कश्मीर में आम नागरिकों और सुरक्षा बलों पर हमले और हिंसा को अंजाम दिया. 1993 में अलगाववादी गतिविधियों अंजाम देने के लिए ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस की स्थापना की गई.
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-भारत एक्सप्रेस
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