दिल्ली हाई कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर टेरर फंडिंग मामले में आरोपी और बारामूला से सांसद राशिद इंजीनियर को राहत देने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने एनआईए से पूछा है कि क्या कड़ी शर्तो के साथ राशिद इंजीनियर को जमानत दी जा सकती है क्या? इन शर्तों में यह शामिल रहेगा कि राशिद इंजीनियर जमानत मिलने के बाद दिल्ली में ही रहेंगे. जस्टिस एम प्रतिभा सिंह की अध्यक्षता वाली पीठ ने एनआईए से यह सवाल पूछा है. कोर्ट 3 नवंबर को मामले में अगली सुनवाई करेगा.
NIA के पास पर्याप्त सबूत
मामले की सुनवाई के दौरान एनआईए की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा में ने राशिद इंजीनियर का यह कहते हुए जमानत का विरोध किया कि उनके खिलाफ एनआईए के पास पर्याप्त सबूत है. उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि एक बार राशिद को जमानत दी गई थी, उस दौरान उन्होंने एक गवाह को प्रभावित करने की कोशिश की थी. जो कॉल डिटेल से पता चला है.
एनआईए के वकील ने कोर्ट को यह भी बताया कि राशिद इंजीनियर के खिलाफ आरोप काफी गंभीर है. लिहाजा उनको जमानत न दिया जाए. साल 2019 से ही तिहाड़ जेल में बंद है. राशिद इंजीयर ने 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान उतरी कश्मीर के बारामुला सीट से चुनाव लड़ा था और उमर अब्दुल्ला को दो लाख से अधिक वोटों से हराया था.
क्या था मामला?
पटियाला हाउस कोर्ट ने 16 मार्च 2022 को हाफिज सईद, सैयद सलाहुद्दीन, यासीन मलिक, शब्बीर शाह और मसरत आलम, राशिद इंजीनियर, जहूर अहमद वताली, बिट्टा कराटे, आफताब बट्ट उर्फ पीर सैफुल्ला के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था.
एनआईए में अनुसार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के सहयोग से लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन, जेकेएलएफ, जैश-ए- मोहम्मद जैसे संगठनों ने जम्मू कश्मीर में आम नागरिकों और सुरक्षा बलों पर हमले और हिंसा को अंजाम दिया. 1993 में अलगाववादी गतिविधियों अंजाम देने के लिए ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस की स्थापना की गई.
यह भी पढ़ें:‘काला हिरण: द बैटल फॉर लिगेसी’ पर कानूनी शिकंजा, जानिए किस बात पर अटकी फिल्म की रिलीज
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.




