Bharat Express DD Free Dish

दिल्ली हाई कोर्ट ने नेशनल मेडिकल कमीशन द्वारा जारी नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार सहित अन्य को नोटिस जारी कर मांगा जवाब

दिल्ली हाई कोर्ट ने नेशनल मेडिकल कमीशन द्वारा जारी नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और तुषार राव गेडेला की पीठ ने यह नोटिस जारी किया है.

Quentin Deacon Drug Case
Edited by Vaibhav Gupta

दिल्ली हाई कोर्ट ने नेशनल मेडिकल कमीशन द्वारा जारी नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और तुषार राव गेडेला की पीठ ने यह नोटिस जारी किया है. यह याचिका यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट ने अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत ने दायर की है.

एमडी/एमएस डॉक्टर्स ही एमबीबीएस छात्रों को पढ़ाए

याचिका में नेशनल मेडिकल कमिशन (एनएमसी) ने मेडिकल कॉलेज के टीचरों की भर्ती नियमों में ढील देने के फैसले को असंवैधानिक करार देने की मांग की गई है. याचिका में विवादित प्रावधानों पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की गई है. याचिका में कहा गया है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि सिर्फ क्लीनिकली क्वालिफाइड एमबीबीएस (एमडी/एमएस) डॉक्टर्स ही एमबीबीएस छात्रों को पढ़ाए.

साथ ही याचिका में नागरिकों के स्वास्थ्य के अधिकार और चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता की रक्षा करने की मांग की गई है.

संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का है उल्लंघन

याचिकाकर्ता के वकील सत्यम सिंह राजपूत का कहना है कि केंद्र सरकार का यह कदम चिकित्सा शिक्षा के मानकों को कमजोर करेगा और एमएससी/पीचडी धारकों को एमबीबीएस, एमडी और एमएस डॉक्टर्स के बराबर ठहराएगा. यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन है.

याचिका में यह भी कहा गया है कि यह राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम 2019 और योग्यता आधारित चिकित्सा शिक्षा प्रणाली के खिलाफ है. इस नए नियमों से एमबीबीएस, एमडी और एमएस डॉक्टर्स के कैरियर पर प्रतिकूल असर पड़ेगा, जिन्होंने कड़ीं मेहनत और राष्ट्रीय स्तरीय परीक्षाओं से गुजरने के बाद यह योग्यता प्राप्त की है.

नॉन मेडिकल फैकल्टी को घटाकर किया गया 15 फीसदी

एनएमसी की ओर से जारी मेडिकल इंस्टिट्यूशन (फैकल्टी की योग्यता) रेगुलेशन, 2025 के मुताबिक एमएससी और पीएचडी डिग्री धारकों को पांच विषयों एनाटॉमी, बायोकेमिस्ट्री, फिजियोलॉजी, फार्मोकोलॉजी व माइक्रोबायोलॉजी के विभागों में बतौर फैकल्टी नियुक्त किया जा सकता है.

वर्ष 2020 में जहां नियमों में इन विभागों में नॉन मेडिकल फैकल्टी को घटाकर 15 फीसदी कर दिया गया था और फार्मोकोलॉजी व माइक्रोबायोलॉजी में 0 फीसदी कर दिया गया था, वहां 2025 के रेगुलेशन में नॉन मेडिकल फैकल्टी की नियुक्ति को इन विषयों में बढ़ाकर 30 फीसदी तक कर दिया गया है. एमएससी और पीचडी योग्यता वाले व्यक्ति अब दो अतिरिक्त विषयों फार्मोकोलॉजी व माइक्रोबायोलॉजी में शिक्षण पदों के लिए आवेदन के पात्र है.



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read