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चीनी वीजा घोटाला मामला: कार्ति चिदंबरम की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने CBI को जारी किया नोटिस, मांगा जवाब

दिल्ली हाई कोर्ट ने चीनी वीजा घोटाले से जुड़े सीबीआई मामले में कार्ति चिदंबरम की याचिका पर सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

दिल्ली हाई कोर्ट ने चीनी वीजा घोटाले से जुड़े सीबीआई के मामले में निचली अदालत द्वारा आरोप तय करने के खिलाफ दायर कार्ति चिदंबरम की याचिका पर सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. जस्टिस मनोज जैन की कोर्ट ने यह नोटिस जारी किया है. कोर्ट 12 फरवरी को अगली सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि आप आरोपों को चुनौती दे रहे हैं, हम कुछ नही कर सकते. सच कहें तो, इसपर रोक नहीं लगाई जा सकती.

मामले की सुनवाई के दौरान कार्ति चिदंबरम की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि बिना लोक सेवक के अपराध नही बनता है. सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 8 और धारा 9 के तहत आरोप बिना किसी लोक सेवक के टिक नही सकते. लूथरा ने कहा कि अभियोजन का पूरा मामला इस आरोप पर आधारित है कि याचिकाकर्ता ने किसी लोक सेवक को रिश्वत दी, लेकिन न तो किसी लोक सेवक को अभियुक्त बनाया गया है और न ही उसकी पहचान बताई गई है. ऐसे में पीसी एक्ट के तहत अपराध नही बनता है. पिछली सुनवाई में जस्टिस गिरीश कथपालिया ने खुद को अलग कर लिया था.

निचली अदालत के फैसले के खिलाफ कार्ति चिदंबरम की याचिका

इससे पहले जस्टिस अनूप जयराम भंभानी और जस्टिस स्वर्णकांता ने खुद को अलग कर लिया था. कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने चीनी वीजा घोटाले में अपने खिलाफ आरोप तय करने के ट्रायल के आदेश को चुनौती देते हुए यह याचिका दायर की है. निचली अदालत ने कार्ति चिदंबरम, उनके चार्टर अकाउंटेंट एस भास्कर रमन सहित 5 अन्य के खिलाफ आपराधिक साजिश के तहत आरोप तय किया था.

हालांकि अदालत ने मामले में आरोपी चेतन श्रीवास्तव को साक्ष्यों के.अभाव में बरी कर दिया था. सीबीआई के अनुसार इस पूरी प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए कार्ति चिदंबरम और उनके सहयोगियों ने कथित तौर पर 50 लाख रुपए की अनुचित राशि प्राप्त की थी. सीबीआई इस मामले में विकास मखारिया को सरकारी गवाह का दर्जा दिया है, जिन्हें अभियोजन पक्ष के लिए अहम माना जा रहा है. सीबीआई की एफआईआर के अनुसार पंजाब के मानसा स्थित एक निजी कंपनी तलवंडी साबो पावर लिमिटेड ने कथित तौर पर चीनी नागरिकों को वीजा दिलवाने के लिए बिचौलियों के जरिए 50 लाख रुपए का भुगतान किया था.

ईडी ने दर्ज किया था मनी लॉन्ड्रिंग केस

बता दें गौरतलब है की प्रवर्तन निदेशालय ने 2011 में 263 चीनी नागरिकों को वीजा जारी करने से संबंधित कथित घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था. इस मामले में कार्ति चिदंबरम के अलावा 3 अन्य लोगों को ईडी ने आरोपी बनाया है. उस समय कार्ति चिदंबरम के पिता पी चिदंबरम केंद्रीय गृह मंत्री थे. चीनी वीजा मामले में सबसे पहले सीबीआई के भ्रष्टाचार के तहत मुकदमा दर्ज किया था, उसके बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत केस दर्ज किया गया था.

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-भारत एक्सप्रेस



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