दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को राजधानी में आवास आवंटित करने के मामले कहा कि आवंटन पूरी तरह से अधिकारियों की इच्छा पर आधारित नहीं हो सकता है. जस्टिस सचिन दत्ता ने केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के संयुक्त सचिव तथा संपदा निदेशालय के निदेशक को 25 सितंबर को इस मामले में ऑनलाइन पेश होने का निर्देश दिया है. अदालत ने कहा कि एक पारदर्शी व्यवस्था होनी चाहिए. यह पूरी तरह से अधिकारियों की मर्जी पर निर्भर नहीं हो सकता.
जब तक स्पष्ट नीति है तो मैं यह जानना चाहता हूं कि प्राथमिकता का आंकलन किस तरह किया जाता है. आवंटन में विवेकाधिकार का इस्तेमाल कैसे किया जाता है. उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि आवंटन के लिए सरकार की मौजूदा नीति को हलफनामे के रूप में पेश किया जाए. उसमें पहले के आवंटन का भी खुलासा किया जाना चाहिए.
ईडी की कार्रवाई और गिरफ्तारी
ईडी ने 21 मार्च 2024 को मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए केजरीवाल को गिरफ्तार किया था. ईडी का आरोप है कि आबकारी नीति को जानबूझकर आप नेताओं को लाभ पहुचाने और कार्टेल गठन को बढ़ावा देने के लिए आप नेताओ को छूट, लाइसेंस शुल्क माफी के बदले शराब कारोबारियों से रिश्वत लेने का आरोप लगाया है.
रिश्वत का पैसा को गोवा चुनाव में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया था.
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भारत एक्सप्रेस
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