Bharat Express DD Free Dish

दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला; किराएदारों से किया गया सीएम केजरीवाल का ‘चुनावी वादा’ कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं

क्या मुख्यमंत्री का प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया गया हर वादा कानूनन लागू किया जा सकता है? दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया है कि 2020 में गरीब किराएदारों का किराया भरने के अरविंद केजरीवाल के आश्वासन को लागू करने के लिए सरकार को मजबूर नहीं किया जा सकता.

delhi-high-court-quashes-order-on-arvind-kejriwal-rent-promise-for-poor-tenants
Edited by Vaibhav Gupta

दिल्ली हाई कोर्ट ने 2021 के सिंगल बेंच के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा 2020 में गरीब किराएदारों की ओर से किराए के भुगतान के लिए किए गए वादों को कानूनी रूप से लागू करने के आदेश को रद्द कर दिया है.

अरविंद केजरीवाल का वादा

जस्टिस सी हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की डिवीजन बेंच ने कहा कि हम दोहराते हैं कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा दिए गए वादे को लागू करने का निर्देश देने के लिए कोई आदेश जारी नहीं किया जा सकता.

इस आदेश में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा 2020 में गरीब किरायेदारों की ओर से किराया देने के किए गए वादों को कानूनी रूप से लागू करने योग्य बना दिया गया था. सिंगल बेंच ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा प्रेसवार्ता करके किराया भुगतान करने संबंधी वादे को लागू का 27 सितंबर 2021 के आदेश दिया था.

दो हफ्ते में लागु करने का था आदेश

सिंगल बेंच ने सितंबर 2022 में किराया देने में असमर्थ गरीबों का किराया भुगतान करने के संबंध में प्रेसवार्ता कर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा की गई घोषणा को दो सप्ताह में लागू करने का आदेश दिया था. बेंच ने अपने फैसले में कहा था कि मुख्यमंत्री द्वारा किया गया एक वादा या आश्वासन स्पष्ट रूप से लागू करने योग्य वादे के बराबर है, जिसके कार्यान्वयन पर राज्य द्वारा विचार किया जाना चाहिए.

हालांकि राज्य ने अपनी अपील में कहा है कि बयान को गलत तरीके से संदर्भ से बाहर करके देखा गया है और इसकी व्यापक और बिना शर्त वादे या प्रतिनिधित्व के तौर पर गलत व्याख्या की गई है.

बयान को नहीं किया जा सकता नजरअंदाज

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि मुख्यमंत्री जब वादा करते हैं तो नागरिक अपेक्षा करते हैं तो इसे पूरा किया जाएगा. सिंगल बेंच ने 89 पेज के अपने फैसले में कहा था कि महामारी और प्रवासी मजदूरों के बड़े पैमाने पर पलायन के कारण घोषित लॉक डाउन की पृष्ठभूमि में जानबूझकर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिए गए एक बयान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

बता दें कि कोरोना काल के दौरान अरविंद केजरीवाल ने अपने भाषण में कहा था कि यदि गरीब किराएदार कोरोना महामारी के दौरान किराए का भुगतान करने में असमर्थ था, राज्य इसका भुगतान करेगा.

ये भी पढ़ें: जेफरी एपस्टीन विवाद: हिमायनी पुरी के पक्ष में आए आदेश के खिलाफ अपील, जल्द सुनवाई को दिल्ली हाई कोर्ट राजी

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read