Delhi High Court: हत्या के मामले में पुलिस रिकार्ड से कुछ केस डायरी के गायब होने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने हैरानी जताई है. अदालत ने कहा कि इससे न केवल इन केस डायरियों की पवित्रता समाप्त हो जाती है, बल्कि जांच की प्रामाणिकता पर भी संदेह पैदा होता है. जस्टिस गिरीश कठपालिया ने यह टिप्पणी की है.
दरअसल कोर्ट ने दायर जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक हत्या के मामले में भी इतनी घटिया जांच की गई है. उन्होंने आरोपी को 10 हजार रुपए के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की एक जमानती पर जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया. अदालत ने जब गायब केस डायरियों के बारे में जांच अधिकारी से पूछा तो उन्होंने जवाब दिया कि उक्त डायरियां नष्ट हो गई होंगी या हटा दिया गया होगा.
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केस डायरियों का अवलोकन किया, जिसमें आरोपी के गिरफ्तारी ज्ञापन में गिरफ्तारी के कारणों का कालम खाली था. जांच अधिकारी ने दलील दी थी कि आरोपी को गिरफ्तारी के आधार अलग से लिखित रूप में दिए गए थे और इसे केस डायरी में दर्ज किया गया था. उसपर मजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर है.
इसी पृष्ठभूमि में कोर्ट को केस डायरी के रखरखाव में विसंगति का पता चला. उसने आगे कहा कि केवल इसी केस डायरी पर मजिस्ट्रेट के कथित हस्ताक्षर है और किसी अन्य तारीख की केस डायरी पर ऐसे हस्ताक्षर नही है.
ये भी पढ़ें: सुपरफास्ट तेजस ट्रेन का शेड्यूल और किराया जारी, जानें कब और कितने में कर सकेंगे सफर
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.





