दिल्ली हाई कोर्ट ने मशहूर संगीतकार इलैयाराजा को फिलहाल 134 फिल्मों के गानों का व्यावसायिक उपयोग करने पर लगी अंतरिम रोक को हटाने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि इलैयाराजा को इस स्टेज पर ‘अन्नक्किली’, ’16 वयाथिनिले’, ‘मुल्लुम मलारुम’, ‘राजा पारवई’ और ‘नेत्रिकन्न’ सहित 134 फिल्मों के गानों का शोषण करने या लाइसेंस देने का कोई अधिकार नहीं है. कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि मामले का अंतिम फैसला होने तक इलैयाराजा इन गीतों के अधिकारों का दोहन या उन्हें लाइसेंस नहीं दे सकते.
सारेगामा इंडिया के पास रहेंगे गानों के राइट्स
इससे पहले भी कोर्ट ने सारेगामा इंडिया के खिलाफ इलैयाराजा की अपील को खारिज कर दिया था. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि इन गानों की असल मालिक ‘सारेगामा’ कंपनी है. हालांकि, कोर्ट ने वेल्स फिल्म से 30 लाख रुपये के लाइसेंस शुल्क की सारेगामा की स्वीकृति के बाद, वेल्स फिल्म को अपनी फिल्म ‘अधतिया’ में गाने का उपयोग करने की अनुमति दी थी.
इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने सारेगामा इंडिया लिमिटेड के पक्ष में एकतरफा फैसला दिया था, जिससे मशहूर म्यूजिक संगीतकार इलैयाराजा को कंपनी द्वारा दावा किए गए कुछ कॉपीराइट्स, साउंड रिकॉर्डिंग और म्यूजिक कार्यों का फायदा उठाने या लाइसेंस देने से रोक दिया गया था. इलैयाराजा भारतीय सिनेमा की कई अलग-अलग फिल्मों में सदाबहार संगीत दे चुके हैं. उनके मशहूर गानों में ‘राजा राजा चोझान’, ‘एन इनिया पोन निलवे’ और ‘अंधियिले वानम’ जैसे गाने शामिल हैं, जो अपने समय के ब्लॉकबस्टर गाने रहे हैं.
पुराने निर्माता समझौतों का हवाला
सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया था कि कॉपीराइट एक्ट 1957 के तहत, अगर किसी कॉन्ट्रैक्ट में अलग से मेंशन न हो तो फिल्म निर्माता को ही कमीशन किए गए काम का पहला कॉपीराइट मालिक माना जाता है. कोर्ट में इसी आधार पर तर्क रखा गया कि संबंधित गानों के राइट्स निर्माता और उनसे जुड़े समझौतों के जरिए ही कंपनी को मिले हैं.
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि वर्ष 1980 में सारेगामा के साथ फिल्म के निर्माता मुडू पाणि के बीच हुए समझौते के अनुसार, साउंड रिकॉर्डिंग और फिल्म के गीतों के संगीत व साहित्यिक कार्यों में कॉपीराइट पूरी तरह सारेगामा के पास निहित है.
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