दिल्ली लाल किला कार ब्लास्ट मामले में दायर उस जनहित याचिका को दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है, जिसमें अदालत की निगरानी में जांच और कमेटी गठित करने की मांग की गई थी. याचिका में यह भी अनुरोध किया गया था कि मुकदमें की सुनवाई रोजाना करने और मासिक प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश देने की मांग की गई थी.
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इस मामले में अभी ट्रायल शुरू नहीं हुआ है. कोर्ट ने कहा कि आप चाहते है कि हम इसकी निगरानी करें? निगरानी तब प्रासंगिक होती है जब मामले सालों तक लंबित रहते हैं, ट्रायल शुरू होने से पहले नहीं. यह याचिका पूर्व विधायक पंकज पुष्कर ने दायर किया था. दायर याचिका में मांग की गई थी कि कोर्ट-सुपरवाइज्ड तंत्र द्वारा ट्रायल के सभी चरणों की निगरानी की जाए और इसे छह महीने के भीतर पूरी करने की मांग की गई थी.
कोर्ट ने हस्तक्षेप से किया इनकार
कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता यह दिखाने में विफल रहे हैं कि किसी मौलिक अधिकार का उल्लंघन हुआ है. जिसके कारण जनहित याचिका के माध्यम से कोर्ट के हस्तक्षेप की आवश्यकता हो. जबकि याचिकाकर्ता की दलील थी कि कोर्ट के दखल देने से पीड़ित परिवारों को आश्वासन मिलेगा. उन्होंने यह भी कहा कि लाल किला ब्लास्ट विस्फोट राष्ट्रीय संप्रभुता पर हमला था और पीड़ित परिवार आज भी सत्य के अधिकार से वंचित हैं, जो याचिका के अनुसार अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा के अधिकार का हिस्सा है.
वही केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि यह याचिका भ्रामक है क्योंकि जांच अब दिल्ली पुलिस के पास नहीं है और ऐसे एनआईए को ट्रांसफर किया जा चुका है और यह ट्रायल यूएपीए के तहत चलेगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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