दिल्ली हाईकोर्ट ने ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज (Britannia Industries) को बड़ी राहत देते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसके तहत कंपनी के न्यूट्रिचॉइस मिलेट्स कूकीज (NutriChoice Millets Cookies) की पैकेजिंग और विज्ञापनों पर ‘नो एडेड शुगर’, ‘नो मैदा’ और ‘नो पाम ऑइल’ जैसे दावे करने से रोका गया था.
न्यायमूर्ति अमित महाजन ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि इन दावों को केवल इस आधार पर अन्य निर्माताओं के उत्पादों को कमतर दिखाने वाला विज्ञापन (Disparaging Advertisement) नहीं माना जा सकता, और न ही यह कहा जा सकता है कि इनसे नियमों के विपरीत उपभोक्ताओं का व्यवहार प्रभावित होता है.
उत्पाद की बिक्री जारी रहेगी
हाईकोर्ट ने FSSAI के 9 अक्टूबर 2026 के आदेश पर रोक लगाते हुए यह अंतरिम राहत दी है. इसके तहत ब्रिटानिया अपने उत्पाद का निर्माण और बिक्री जारी रख सकती है. हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कंपनी अपने उत्पाद पर ‘100 फीसदी मिलेट्स’ (100% Millets) का दावा नहीं कर सकती. ब्रिटानिया पहले ही इस दावे को स्वेच्छा से हटाने पर सहमति जता चुकी है.
सुनवाई के दौरान ब्रिटानिया की दलीलें
ब्रिटानिया ने FSSAI के आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी. सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से निम्नलिखित मुख्य तर्क दिए गए. कंपनी का कहना था कि ‘नो एडेड शुगर’, ‘नो मैदा’ और ‘नो पाम ऑइल’ उत्पाद में इस्तेमाल की गई वास्तविक सामग्री से जुड़े तथ्यात्मक (Factual) दावे हैं. खाद्य सुरक्षा एवं मानक (विज्ञापन और दावे) विनियम, 2018 के तहत इन पर किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं है.
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व्यक्तिगत सुनवाई का मुद्दा
कंपनी ने कहा कि 7 अक्टूबर को हुई व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान उसने इन तीनों दावों (नो एडेड शुगर, नो मैदा और नो पाम ऑइल) को वापस लेने पर कोई सहमति नहीं दी थी. ब्रिटानिया ने यह भी आरोप लगाया कि FSSAI ने उसका पक्ष सुने बिना ही सितंबर में नोटिस जारी कर दिया और साथ ही उस नोटिस को लाइसेंसिंग अधिकारियों, ई-कॉमर्स कंपनियों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ साझा कर दिया था. इसके जरिए विज्ञापनों को तुरंत हटाने और कानूनी कार्रवाई की मांग की गई थी.
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