दिल्ली हाई कोर्ट ने टीएमसी के सांसद साकेत गोखले से पूछा है कि संयुक्त राष्ट्र में भारत की पूर्व सहायक महासचिव लक्ष्मी पूरी की मानहानि के मामले में अदालत के आदेश के बावजूद सार्वजनिक माफी न मांगने के पीछे उनका कारण क्या है. जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा ने कहा कि मांफी मांगने के आदेश पर जब कोई रोक नहीं है तो अभी तक सार्वजनिक मांफी क्यों नहीं प्रकाशित की गई.
साकेत गोखले को कोर्ट ने लगाई फटकार
मामले की सुनवाई के दौरान साकेत गोखले की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि संबंधित निर्देश को वापस लेने की अर्जी लंबित हैं और उसपर 15 अप्रैल को सुनवाई होनी है. इसलिए इस मामले को उसके बाद सुनवाई के लिए लगाया जाए. इसपर पूरी की ओर से पेश वकील ने कहा कि संबंधित पीठ के समक्ष मामला देर से दाखिल किया गया है, न कि आदेश को वापस लेने की उनकी मुख्य अर्जी पर. अदालत ने कहा कि जब निर्णय पर रोक नहीं है, तो माफी प्रकाशित न करने के पीछे आपका क्या कारण है? अगर स्थगन नहीं है तो आपको मांफी मांगनी पड़ेगी.
कोर्ट 24 अप्रैल को करेगा अगली सुनवाई
कोर्ट 24 अप्रैल को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. कोर्ट ने पिछले साल 1 जुलाई को गोखले से चार सप्ताह के भीतर सोशल मीडिया पर मांगने और पूरी को 50 लाख रुपए का हर्जाना देने को कहा था. उस आदेश के क्रियान्वयन नहीं होने पर पूरी ने याचिका दाखिल कर आदेश को क्रियान्वयन की मांग की थी. लक्ष्मी पूरी ने याचिका में कहा है कि प्रतिवादी गोखले ने अपने एक ट्वीट में स्विस बैंक खातों और विदेशी काले धन का उल्लेख किया है और वादी और उसके पति के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जांच का आदेश देने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री को टैग किया है.
लक्ष्मी पूरी ने गोखले के खिलाफ लगाया आरोप
संयुक्त राष्ट्र की पूर्व सहायक महासचिव लक्ष्मी पूरी ने अपनी याचिका में कहा कि साकेत गोखले ने 13 और 23 जून 2021 को उनके और उनके पति हरदीप सिंह पूरी के खिलाफ झूठा और अपमानजनक आरोप लगाया था और कहा था कि दंपति ने वर्ष 2006 में जिनेवा (स्वीटजरलैंड) में काले धन से एक घर खरीदा है. गोखले ने जून 2021 में कई पोस्ट में सवाल उठाया था कि लक्ष्मी पूरी ने 2006 में अपनी तत्कालीन आय से जिनेवा में 1.6 मिलियन स्विस फ्रैंक का घर कैसे खरीदा.
-भारत एक्सप्रेस
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