दिल्ली हाई कोर्ट ने रेल दुर्घटना में मृत एक व्यक्ति के माता-पिता को मुआवजा देने का महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. जस्टिस धर्मेश शर्मा की बेंच ने कहा कि मृतक के पास यात्रा टिकट न होने से मुआवजे का दावा खारिज नहीं किया जा सकता.
कोर्ट ने रेलवे को मृतक के माता-पिता को 8 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया, साथ ही घटना की तारीख से भुगतान तक 12% ब्याज देने को कहा.
मामला 2017 का है, जब 24 वर्षीय युवक अपनी बहन और भतीजे के साथ जबलपुर-निजामुद्दीन महाकौशल एक्सप्रेस से दिल्ली जा रहा था. आगरा के पास वह गलती से ट्रेन से गिर गया और अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. मृतक के माता-पिता ने मुआवजे के लिए याचिका दायर की थी, लेकिन रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल ने टिकट न होने का हवाला देकर दावा खारिज कर दिया. ट्रिब्यूनल का मानना था कि मृतक वास्तविक यात्री नहीं था.
दिल्ली हाई कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के फैसले को पलटते हुए कहा कि यात्री की रेल में मौजूदगी के साक्ष्य मुआवजे के लिए पर्याप्त हैं. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कई बार एक साथ कई यात्रियों के टिकट बनाए जाते हैं, इसलिए प्रत्येक के पास अलग टिकट होना जरूरी नहीं.
कोर्ट ने साबित माना कि मृतक ने यात्रा से पहले टिकट खरीदा था. यह फैसला रेल दुर्घटना पीड़ितों के लिए एक मिसाल बन सकता है. मुआवजे की राशि मृतक के परिवार को आर्थिक सहारा प्रदान करेगी. कोर्ट के इस आदेश से रेलवे की जवाबदेही भी बढ़ेगी.
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