दिल्ली हाई कोर्ट ने डिजिटल लोन ऐप्स की मनमानी के खिलाफ दायर याचिका पर आरबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की पीठ ने केंद्र सरकार और आरबीआई से जवाब मांगा है. यह जनहित याचिका हिमाक्षी भार्गव की ओर से दायर की गई है.
दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि ऐप्स लोन लेने वालों की निजता और डेटा सुरक्षा के नियमों का उल्लंघन हो रहा है. कोर्ट ने कहा कि हम आपके द्वारा की जा रही कार्रवाई को लेकर चिंतित है. कोर्ट ने आरबीआई से याचिका में लगाए गए आरोपों और 2025 (डिजिटल ऋण) दिशानिर्देशों के प्रवर्तन के लिए की गई कार्रवाई के संबंध में एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है.
आरबीआई द्वारा दाखिल किए गए हलफनामे में इन निर्देशों के उल्लंघन के मामले में संबंधित अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई का विवरण होना चाहिए.
बिना शर्त सहमति थोप रहे लोन ऐप्स
दायर याचिका में कहा गया है कि 8 मई 2025 को जारी आरबीआई की दिशानिर्देश में डिजिटल लेंडिंग एप्लिकेशन को मोबाइल फोन के रिसोर्स जैसे कांटैक्ट लिस्ट, कॉल लॉग और टेलीफोनी फंक्शन तक पहुचने से साफ इंकार किया गया है. दायर याचिका में यह भी कहा गया है कि गूगल प्ले और एप्पल स्टोर पर उपलब्ध कई डिजिटल लेंडिंग एप्लिकेशन की जांच में पाया गया है होम क्रेडिट, ब्रांच, धनी और जेस्टमनी सहित कई NBFC समर्थित एप्लिकेशन अभी भी उधारकर्ताओं की कॉन्ट्रैक्ट लिस्ट और कॉल लॉग तक पहुच रहे है. बहुत ज्यादा डेटा इकठ्ठा कर रहे हैं और बिना शर्त सहमति की शर्तें थोप रहे हैं.
दायर याचिका में यह भी कहा गया है कि ये ऐप्स जिस तरह का डेटा ले रहे हैं, उसका लोन देने या पहचान करने से कोई लेना देना नहीं है. याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि उन्होंने नवंबर 2025 में ही इन शिकायतों को लेकर आरबीआई को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी थी, लेकिन उस पर कोई ठोस कार्रवाई नही की गई है.
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-भारत एक्सप्रेस
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