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दिल्ली हाईकोर्ट ने पति की पैतृक संपत्ति की नीलामी पर लगाई रोक, गुजारा भत्ता विवाद में बड़ा फैसला

Legal News: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक मजिस्ट्रेट के आदेश पर रोक लगाई है, जिसमें पति की पैतृक संपत्ति के हिस्से की नीलामी कर पत्नी को गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया गया था. कोर्ट ने इसे गंभीर कानूनी मुद्दा बताते हुए 28 अगस्त तक के लिए नीलामी पर रोक लगा दी है.

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दिल्ली हाईकोर्ट

Legal News: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक मजिस्ट्रेट की अदालत के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें पत्नी को गुजारा भत्ता देने के लिए पारिवारिक संपत्ति में से पति के हिस्से की नीलामी का निर्देश दिया गया था.

पति ने सीपीसी की धारा 60(1)(सीसीसी) के उल्लंघन का हवाला देते हुए कहा था कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने घर में रहने का अधिकार है. किसी व्यक्ति के पास मौजूद एकमात्र घर का निष्पादन नहीं किया जा सकता है.  कोर्ट ने उसे एक महत्वपूर्ण कानूनी मुद्दा बताया और मजिस्ट्रेट के आदेश पर रोक लगा दी.

कोर्ट ने यह रोक 28 अगस्त तक के लिए लगाई है. तब तक नीलामी नही होगी. पत्नी ने 26 अप्रैल 2017 और 20 अगस्त 2020 को गुजारा भत्ता लेने का आदेश प्राप्त किए थे. भगतान न होने पर उसने मजिस्ट्रेट की अदालत का रुख किया था. मजिस्ट्रेट ने फिर पैतृक संपत्ति में से पति के हिस्से को कुर्की व बेचने का आदेश दिया था.

पति के भाई ने उस आदेश को चुनौती देते हुए कहा था कि वह भी उस संपत्ति का मालिक है और यह उसका प्राथमिक निवास स्थान है. उसने उक्त धारा का हवाला देते हुए कहा था कि किसी कर्जदार का मुख्य आवासीय संपत्ति को बेचा नही जा सकता है.

कोर्ट ने कहा कि अगर समझौते की सत्यता पर विचार किए बिना संपत्ति का एक चौथाई हिस्से को बेचने की अनुमति दी जाती है, तो याचिककर्ताओ को अपूरणीय क्षति हो सकती है.

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-भारत एक्सप्रेस 

 



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