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दिल्ली हाई कोर्ट से रेस कोर्स झुग्गीवासियों को बड़ी राहत, 1 जुलाई तक तोड़फोड़ की कार्रवाई पर लगी रोक

दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित रेस कोर्स इलाके की तीन झुग्गी बस्तियों में 1 जुलाई तक तोड़फोड़ की कार्रवाई पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन्होंने वैकल्पिक आवास नहीं लिया है, उन्हें फिलहाल बेदखल न किया जाए.

DELHI HIGH COURT

दिल्ली हाई कोर्ट से रेस कोर्स इलाके की झुग्गियों में रहने वाले लोगों को फिलहाल राहत मिल गई है. कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि रेस कोर्स इलाके की झुग्गियों में रहने वाले लोगों के घरों को 1 जुलाई तक नहीं तोड़ा जाए. कोर्ट ने यह आदेश उन लोगों के लिए दिया है जिन्होंने वैकल्पिक आवास को स्वीकार नहीं किया है और कहीं और रहने नहीं गए हैं. जस्टिस तेजस करिया और जस्टिस मधु जैन की पीठ ने यह आदेश दिया है.

‘मर्जी के बिना 1 जुलाई तक नहीं छू सकते’

कोर्ट ने भाई राम कैंप, डीआईडी (DID) कैंप व मस्जिद कैंप के कुछ निवासियों की ओर से दायर अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि अगर वो अपनी मर्जी से नहीं गए हैं, तो आप उन्हें 1 जुलाई तक नहीं छू सकते. कोर्ट ने यह भी कहा कि वह एक आदेश पास करेगी; कोर्ट ने कहा कि एक निवासी दो घरों पर अपना दावा नहीं कर सकता है. कोर्ट ने कहा कि आदेश साफ है, जिन लोगों ने दूसरा घर ले लिया है, उनके पास दो घर नहीं हो सकते.

बता दें कि 11 मई को सिंगल बेंच ने तीन झुग्गियों के लोगों को तुरंत निकालने में दखल देने से इनकार कर दिया था और उनसे 15 दिनों के अंदर कैंप को खाली करने को कहा था. अधिकारियों के मुताबिक इन झुग्गियों में रहने वाले लोगों के लिए पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है. अधिकारियों के अनुसार, अदालत ने अधिकारियों को रेस कोर्स इलाके में प्रधानमंत्री आवास के पास तीन झुग्गी बस्तियों को हटाने का निर्देश दिया था और कहा था कि लोगों की शिकायतों को सुनने के लिए पुनर्वास स्थलों पर शिविर लगाए जाएं. झुग्गी निवासियों का कहना है कि पुनर्वास और विस्थापन की प्रक्रिया को लेकर उनकी चिंताओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए.

केंद्र ने किया दावों का खंडन

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने आरोप लगाया कि मुकदमा लंबित होने के बावजूद अधिकारियों ने रविवार को इलाके में तोड़फोड़ की कार्रवाई की. उन्होंने यह भी कहा कि पहले हाई कोर्ट और अधिकारियों के बीच यह सहमति बनी थी कि अपील लंबित रहने के दौरान कोई जबरन कार्रवाई नहीं की जाएगी. उन्होंने कहा कि पुनर्वास से जुड़े मुद्दे अभी अदालत में विचाराधीन हैं, इसलिए झुग्गीवासियों को वहां से हटाने की फिलहाल कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए.

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वहीं केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने आरोपों का विरोध करते हुए कहा कि तोड़फोड़ की कार्रवाई हाई कोर्ट के हालिया आदेश के अनुरूप की गई थी. केंद्र की ओर से यह भी कहा गया है कि जबरन कार्रवाई पर रोक लगाने से संबंधित विशेष आदेश को कोर्ट पिछली सुनवाई में हटा चुका है. उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों ने दूसरा घर ले लिया है, वे जेजे (JJ) क्लस्टर में अपने घरों पर कब्जा करने का दावा नहीं कर सकते. अधिकारियों ने दूसरे घर से सुविधाएं देने के हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन किया है.



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