दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने राजपूताना राइफल्स के लगभग तीन हजार से अधिक जवानों को हर सुबह परेड ग्रांउड की ओर जाने के लिए अपने बैरक से बाहर निकलते समय गंदे नाले से गुजरने को देखते हुए मामले पर स्वत: संज्ञान ले लिया है.
जस्टिस प्रतिबा मनिंदर सिंह एवं जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की पीठ ने कहा कि जवानों को दिन में चार बार पुलिया से गुजरना पड़ता है. नाले में पानी भरा हुआ है और उसमें कीचड़ है. कई जगहों पर कमर तक पानी भरा है. यह अस्वीकार्य है.
कोर्ट ने दिल्ली छावनी बोर्ड को 29 मई तक रिपोर्ट जमा करने का दिया आदेश
कोर्ट ने इस मुद्दे पर दिल्ली छावनी बोर्ड को 29 मई तक एक संक्षिप्त स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है. इस मामले में 29 मई को अगली सुनवाई होगी. उसने यह संज्ञान एक मीडिया की रिपोर्ट पर लिया है जिसमें कहा गया है कि नाले पर पुल बनाने का अनुरोध किया गया था, लेकिन अभी तक निर्माण नहीं हुआ है.
पीठ ने संज्ञान दो याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान लिया जिसमें वर्ष 2024 से राजधानी के भीतर कई नालों की सफाई के लिए समय-समय पर निर्देश जारी किए गए थे. उसने कहा कि नाले से मार्च करने वाले जवानों से संबंधित समाचार पत्र की रिपोर्ट वास्तव में एक अस्वीकार्य स्थिति है.
दिल्ली में तैमूर नाले के अवैध अतिक्रमण हटाने के आदेश
कोर्ट ने फरवरी में विशेष कार्य बल को दिल्ली में तैमूर नाले के प्राकृतिक प्रवाह को बाधित करने वाले सभी अवैध अतिक्रमणों और निर्माणों को हटाने का निर्देश दिया था. उसमें एक पांच मंजिला इमारत भी शामिल है.
उसने कहा था कि नाले को गिराने और विस्तार करने का काम सही तरीके से जारी रहना चाहिए. साथ ही नाले की सफाई एक सतत रूप में की जानी चाहिए. उसके तहत सुबह व शाम कम से कम दो बार काम किया जाना चाहिए. कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि नाले के आसपास के कचरे की सफाई एमसीडी की जिम्मेदारी होगी.
ये भी पढ़ें: श्री बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, यूपी सरकार से मांगी परियोजना की पूरी जानकारी
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

