Junior Court Assistant Recruitment: सुप्रीम कोर्ट द्वारा जूनियर कोर्ट असिस्टेंट भर्ती परीक्षा को लेकर दिए गए आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट ने बरकरार रखा है. साथ ही कोर्ट ने दायर याचिका को खारिज कर दिया है. जस्टिस प्रतीक जलान ने यह आदेश दिया है. हाई कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को अपने प्रशासनिक विवेकाधिकर के तहत इस तरह का मानदंड तय करने का पूरा अधिकार है.
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि भर्ती विज्ञापन में टाइपिंग टेस्ट में न्यूनतम अंक की शर्त का कोई उल्लेख नहीं था. ऐसे में चयन प्रक्रिया के बीच में अचानक से कट-ऑफ लागू करना गेम के नियम बदलने जैसा है, जो उम्मीदवारों के साथ नाइंसाफी है. लेकिन कोर्ट ने याचिकाकर्ता की इन दलीलों को खारिज कर दिया.
भर्ती प्रक्रिया में नहीं होगा कोई बदलाव: कोर्ट
कोर्ट ने कहा कि टाइपिंग टेस्ट भर्ती प्रक्रिया का अनिवार्य और वस्तुनिष्ठ हिस्सा है. कोर्ट ने कहा कि शॉर्टलिस्टिंग भर्ती प्रक्रिया के एक अंतरिम चरण में कई गई थी और उम्मीदवारों को पहले से ही पता था कि टाइपिंग टेस्ट में उनका आकलन गति और शुद्धता के आधार पर होगा. इसके मूल्यांकन पद्धति में कोई बदलाव नही किया गया है. हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि चयन प्रक्रिया का उद्देश्य सर्वश्रेष्ठ और उपयुक्त उम्मीदवारों का चयन करना है और इसमें पक्षपात या मनमानी करने जैसा कोई आरोप नही है और ना ही कोई अवैधता है.
बता दें कि याचिककर्ताओ ने टाइपिंग स्पीड टेस्ट पास कर लिया था, लेकिन 43.18 से कम अंक होने के कारण उन्हें अगले चरण देने से रोक दिया गया था. उनका कहना था कि बेंचमार्क मूल विज्ञापन में नहीं था और इससे संबंधित नियम बीच में ही बदल दिया गया.
ये भी पढ़ें: ‘छपरियों’ की बल्ले-बल्ले! Linkedin पर TikTok ने निकाली नौकरियां, क्या फिर से हो रही चाइनीज़ ऐप की वापसी?
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

