दिल्ली-एनसीआर में गंभीर रूप से बढ़ते प्रदूषण और खराब होती हवा की स्थिति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कड़ी चिंता जताई है. शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और संबंधित एजेंसियों को प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए सख्त और प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं.
इस बीच, प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली सरकार द्वारा बीएस-VI (BS-VI) मानक से कम श्रेणी के वाहनों (विशेषकर बीएस-III और बीएस-IV पुरानी गाड़ियों) के प्रवेश पर रोक लगाई गई थी. हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने वकीलों और कोर्ट स्टाफ को इस प्रतिबंध से बड़ी राहत दे दी है.
दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के मुख्य बिंदु
- वकीलों और स्टाफ को छूट: हाईकोर्ट ने वकीलों और कोर्ट स्टाफ को गैर-पंजीकृत बीएस-VI से पहले के (Pre-BS-VI) वाहनों के साथ दिल्ली में प्रवेश करने की अनुमति दे दी है.
- समय सीमा: अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यह छूट केवल अदालत के कार्य दिवसों (Working Days) के दौरान ही लागू होगी.
आम जनता और जानकारों की प्रतिक्रिया
वकीलों का पक्ष: दिल्ली हाईकोर्ट के वकील सुरेश प्रसाद का कहना है कि देश और समाज के लिए मौजूदा समय में प्रदूषण सबसे बड़ा खतरा है, जिस पर गंभीर मंथन की जरूरत है.
ऑटो चालकों का विरोध: दूसरी ओर, ऑटो चालक सिद्धार्थ का मानना है कि नियम और कानून समाज के हर वर्ग के लिए एक समान होने चाहिए. केवल चुनिंदा वर्ग को इस तरह की छूट देना और आम जनता पर पाबंदी लगाना सही नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों के स्वास्थ्य, नागरिकों में प्रदूषण के प्रति जागरूकता की कमी और नियमों के पालन में हो रही प्रशासनिक लापरवाही पर गहरी नाराजगी जताई है. कोर्ट ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं. दिल्ली-एनसीआर में वाहनों की भारी संख्या और लगातार लगने वाले ट्रैफिक जाम को प्रदूषण का एक प्रमुख कारण बताते हुए अधिकारियों को प्रभावी ट्रैफिक मैनेजमेंट के निर्देश दिए गए हैं.
कोर्ट ने प्रदूषण से निपटने के लिए तत्काल (Short-term), मध्यम अवधि और दीर्घकालिक (Long-term) रणनीतियों पर एक साथ काम करने पर जोर दिया है. किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन देने और पराली की खरीद की व्यवस्था करने का सुझाव दिया गया है. कोर्ट ने कहा कि पराली की खरीद की कीमत पहले से तय करके घोषित की जानी चाहिए और इसकी व्यवस्था सीधे ग्राम पंचायतों तक पहुंचाई जानी चाहिए.
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कोर्ट ने माना कि केवल अदालती आदेशों और कागजी प्रतिबंधों से यह समस्या हल नहीं हो सकती, बल्कि इसके खिलाफ ‘जन आंदोलन’ खड़ा करना होगा. दीवाली जैसे त्योहारों पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पार्षदों को आगे आकर लोगों से प्रदूषण न फैलाने की अपील करनी चाहिए.
बॉर्डर पर प्रदूषण रोकना
दिल्ली की सीमाओं पर वाहनों के लंबे समय तक खड़े रहने और उनके इंजन चालू रहने से होने वाले धुएं को रोकने के लिए विशेष उपाय करने को कहा गया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल पानी का छिड़काव करने या वाहनों को रोकने जैसे पारंपरिक उपायों के अलावा अब नए और व्यावहारिक समाधान तलाशने होंगे.
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