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प्रवर्तन निदेशालय ने की 36वीं तिमाही बैठक में बड़ा एक्शन प्लान, जांच का समय 4-5 साल से घटाकर डेढ़ साल करने का लक्ष्य

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आर्थिक अपराधों की जांच और मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित मामलों में ट्रायल को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए बड़ा एक्शन प्लान तैयार किया है. बेंगलुरु में 14 और 15 सितंबर को आयोजित ईडी की 36वीं तिमाही बैठक में जांच से लेकर ट्रायल और जब्त संपत्तियों की पीड़ितों को वापसी तक कई अहम फैसले लिए गए है.

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आर्थिक अपराधों की जांच और मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित मामलों में ट्रायल को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए बड़ा एक्शन प्लान तैयार किया है. बेंगलुरु में 14 और 15 सितंबर को आयोजित ईडी की 36वीं तिमाही बैठक में जांच से लेकर ट्रायल और जब्त संपत्तियों की पीड़ितों को वापसी तक कई अहम फैसले लिए गए है. बैठक से पहले 13 सितंबर को आईआईएम बेंगलुरु में मैनेजमेंट और लीडरशिप वर्कशॉप भी आयोजित की गई. इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, साइबर क्राइम, डीपफेक, डिजिटल फ्रॉड, एसेट ट्रेसिंग और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा हुई. इस बैठक में चार प्रमुख प्राथमिकताएं तय कीं—कैडर रिस्ट्रक्चरिंग को समयबद्ध तरीके से लागू करना, तकनीक और फोरेंसिक क्षमता बढ़ाना, पीएमएलए ट्रायल और दोषसिद्धि में तेजी लाना तथा आर्थिक अपराधों के पीड़ितों को संपत्तियों की जल्द से जल्द वापसी सुनिश्चित करना.

ईडी में 60 फीसदी बढ़ेगी स्वीकृत पदों की संख्या

बैठक में बताया गया कि केंद्र सरकार ने ईडी के लंबे समय से लंबित कैडर रिस्ट्रक्चरिंग को मंजूरी दे दी है. इसके तहत निदेशालय में स्वीकृत पदों की संख्या 2,029 से बढ़ाकर 3,256 की जाएगी. फील्ड स्ट्रक्चर में 50 पीएमएलए जोन और 5 अलग फेमा जोन बनाए जाएंगे. वहीं कार्यरत यूनिटों की संख्या 131 से बढ़ाकर 241 करने का लक्ष्य है. इस व्यवस्था को 1 जनवरी 2027 से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है.
ईडी का लक्ष्य जांच की मौजूदा अवधि को 4-5 साल से घटाकर करीब डेढ़ साल करना है.

हर जोन में 10 बड़े मामलों में 6-8 महीने में ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य

ईडी ने सभी जोन को निर्देश दिया है कि वे कम से कम 10 हाई-प्रोफाइल मामलों की पहचान करें और इन मामलों में 6 से 8 महीने के भीतर ट्रायल पूरा कराकर दोषसिद्धि की दिशा में काम करें. पीएमएलए मामलों में देरी रोकने के लिए केस मैनेजमेंट को भी मजबूत किया जाएगा. छह महीने से ज्यादा समय से संज्ञान के इंतजार में लंबित मामलों की हर महीने समीक्षा होगी. दस साल से ज्यादा पुराने मामलों के लिए अलग मॉनिटरिंग रजिस्टर बनाया जाएगा.

साइबर और एआई आधारित अपराधों पर विशेष नजर

बैठक में जांच एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और तकनीक के ज्यादा इस्तेमाल पर जोर दिया गया. NATGRID, कॉरपोरेट फाइलिंग, इमिग्रेशन डेटाबेस और वर्चुअल डिजिटल एसेट ट्रांजेक्शन से जुड़े डेटा का इस्तेमाल बढ़ाने पर चर्चा हुई. साथ ही ईडी अधिकारियों को चेताया गया कि एआई का ऑफलाइन इस्तेमाल भी डेटा लीक का जोखिम पैदा कर सकता है. इसलिए गोपनीय केस सामग्री की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए.

आईबीसी-पीएमएलए के मामलों में प्रमोटरों की वापसी पर नजर

ईडी ने दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) और पीएमएलए से जुड़े मामलों में कथित गड़बड़ियों की दोबारा जांच पर भी जोर दिया. खास तौर पर ऐसे मामलों पर नजर रखने को कहा गया है, जहां बड़ी ‘haircut’ के जरिए प्रमोटर दोबारा संपत्तियों पर नियंत्रण हासिल कर लेते हैं. संबंधित मामलों में सेक्शन 29A से बचने, फर्जी या बढ़े हुए संबंधित पक्षों के दावे, लेनदारों की समिति में हेरफेर और संपत्तियों को हड़पने से संभावित तौर-तरीकों की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं.

क्रिप्टो और हवाला नेटवर्क की नई तकनीकों पर चर्चा

ईडी की बैठक में क्रिप्टो इकोसिस्टम में अपराध के नए तरीकों पर भी विशेष सत्र हुआ. इसमें विकेंद्रित वित्त व्यवस्था, संपत्तियों को डिजिटल टोकन में बदलना, हवाला नेटवर्क और स्थिर मुद्रा के जरिए सीमा पार पैसों के ट्रांसफर जैसे मामलों पर चर्चा हुई.
जांच एजेंसी ने अलग-अलग ब्लॉकचेन नेटवर्क के बीच क्रिप्टो परिसंपत्तियों को बार-बार स्थानांतरित करना, अलग-अलग ब्लॉकचेन के बीच क्रिप्टो परिसंपत्तियों के हस्तांतरण की सुविधा देने वाले क्रॉस-चेन ब्रिज, क्रिप्टो लेनदेन के स्रोत और गंतव्य को छिपाने वाले क्रिप्टो मिक्सर, क्रिप्टो की पहचान/लेनदेन के स्रोत को छिपाने के लिए अलग-अलग लेनदेन को मिलाने वाली टम्बलर सेवाएं, लेनदेन की पहचान और विवरण को अधिक गोपनीय रखने वाली प्राइवेसी कॉइन/गोपनीयता-केंद्रित क्रिप्टोकरेंसी, किसी बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज या वॉलेट के भीतर बनाए गए अधीनस्थ/नेस्टेड खाते, जिनके जरिए लेनदेन किए जाते हैं, एनएफटीई की कीमत या कारोबार को कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए आपस में जुड़े खातों के बीच बार-बार खरीद-बिक्री करना, जैसी तकनीकों के इस्तेमाल को भी जांच के नजरिए से समझा.

पीड़ितों को 73,800 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति लौटाई

ईडी ने बैठक में क्षतिपूर्ति यानी पीड़ितों को अवैध तरीके से हासिल संपत्तियों की वापसी पर भी जोर दिया. एजेंसी के मुताबिक अब तक 76 मामलों में 73,800 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति लौटाई जा चुकी है. ईडी ने तय किया है कि जहां संभव हो, आरोप तय होने का इंतजार किए बिना संपत्ति की बहाली के लिए आवेदन किए जाएं. बड़ी संख्या में निवेशकों वाले मामलों या राज्य की संपत्तियों से जुड़े मामलों में स्पेशल कोर्ट्स के समक्ष भी कार्रवाई की जाएगी.

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-भारत एक्सप्रेस



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