प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मिजोरम-म्यांमार सीमा से लगे कि चाम्फाई जिले में सुखी सुपारी की हो रही अवैध तस्करी के मामले में बड़ी कार्रवाई की है. यह कार्रवाई इससे जुड़े एक बड़े नेटवर्क के खिलाफ की गई है.
स्थानीय कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई
ईडी की टीम चाम्फाई में 9 जगहों पर छापेमारी कर रही है. ईडी की यह कार्रवाई उन स्थानीय कारोबारियों और कथित सहयोगियों के खिलाफ की जा रही है, जो सीमा पार से होने वाली तस्करी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे. अभी तक के जांच में सामने आया है कि आरोपी म्यांमार से टियाउ नदी के रास्ते अवैध रूप से सुपारीकी खेप भारत लाते थे और उन्हें स्थानीय गोदामों में संग्रहित करते थे.
इसके बाद फर्जी ई-वे बिल और जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल कर इन खेपों को स्थानीय स्तर पर खरीदा गया माल बताकर वैध दिखाया जाता था. ईडी के अनुसार इस अवैध कारोबार के जरिए सैकड़ों करोड़ रुपए की लेन देन हुई है. जिसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है.
असंबंधित आयात दस्तावेजों का लिया सहारा
जांच एजेंसी का ये भी आरोप है कि कुछ आरोपियों ने अपने स्थानीय जनजातीय दर्ज का दुरुपयोग करते हुए सीमा शुल्क अधिकारियों के समक्ष खुद को वैध आयातक के रूप में पेश किया. इसके लिए उन्होंने पुराने और असंबंधित आयात दस्तावेजों का सहारा लेकर जब्त की गई तस्करी की सुपारी को छुड़ाने की कोशिश की.
ईडी फिलहाल इस पूरे नेटवर्क की वित्तीय गतिविधियों और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है. बता दें कि कुछ साल पहले अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम से होकर गुजरने वाली भारत-म्यांमार की अंतरराष्ट्रीय सीमा, जो घने जंगलों से घिरी हुई है.
सशस्त्र विद्रोहों की मांग
पूर्वोत्तर क्षेत्र के कई सशस्त्र विद्रोहों की मांग को पूरा करने के लिए AK 47 और AM 16 जैसी घातक बंदूकों की आवाजाही के लिए एक पसंदीदा मार्ग के रूप में कुख्यात थी. लेकिन अब ऐसा नहीं है. म्यांमार की गुप्त फैक्ट्रियों में उत्पादित नशीली दवाओं के अलावा, चीन की खानों से प्राप्त उच्च गुणवत्ता वाला सोना और म्यांमार से प्राप्त सुखी सुपारी पूर्वोत्तर क्षेत्र में अपनी पैठ बना रही है, जिसे फिर दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे राज्यों में भेजा जाता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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