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प्रवर्तन निदेशालय की बड़ी कार्रवाई: संतोष ओवरसीज पर ED का छापा, 450 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले का खुलासा

IDBI बैंक के नेतृत्व वाले 7 बैंकों के कंसोर्टियम से 450 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में ED ने संतोष ओवरसीज लिमिटेड के ठिकानों पर छापेमारी की है. CBI की FIR के आधार पर शुरू हुई इस जांच में फर्जी बिलों, शेल कंपनियों और अवैध फंड ट्रांसफर के कई मामले सामने आए हैं.

सरायकेला बैंक घोटाले में ED ने झारखंड और ओडिशा के 7 ठिकानों पर मारा छापा.

सरायकेला बैंक घोटाले में ED ने झारखंड और ओडिशा के 7 ठिकानों पर मारा छापा.(PC: भारत एक्सप्रेस)

Edited by Radha Priya

बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों पर नकेल कसते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने संतोष ओवरसीज लिमिटेड और उससे जुड़ी कंपनियों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत कड़ी कार्रवाई की है. एजेंसी ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश और पंजाब समेत करीब आठ ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू की है.

ED की यह ताजा कार्रवाई केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज की गई मूल शिकायत पर आधारित है. कंपनी और उसके प्रमोटरों पर आरोप है कि उन्होंने बैंकों के एक कंसोर्टियम (समूह) के साथ लगभग 424 करोड़ से 450 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी को अंजाम दिया. CBI की शुरुआती जांच के अनुसार, कंपनी ने अपनी ही एक सहयोगी कंपनी के नाम पर फर्जी परचेज ऑर्डर तैयार किए और बैंकों से ‘पैकिंग क्रेडिट’ (एक प्रकार की लोन सुविधा) का अनुचित लाभ उठाया.

फर्जी बिलों और शेल कंपनियों का नेटवर्क

जांच में यह बात खुलकर सामने आई है कि ऋण के रूप में मिली भारी-भरकम राशि को सुनियोजित तरीके से ठिकाने लगाया गया. ED के अनुसार, रकम को छिपाने के लिए निम्नलिखित हथकंडों का इस्तेमाल किया गया:

फर्जी बिलिंग: कागजी लेनदेन के जरिए बिल तैयार किए गए.

शेल कंपनियां: कागजी कंपनियों के जरिए फंड को डायवर्ट किया गया.

एंट्री ऑपरेटर: अवैध वित्तीय लेनदेन को सही ठहराने के लिए एंट्री ऑपरेटरों की मदद ली गई.

अंदरूनी ट्रांसफर: कंपनियों के आपस में ही संदिग्ध वित्तीय लेनदेन दिखाकर पैसों को इधर-उधर किया गया.

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क्या होती हैं शेल कंपनियां?

शेल कंपनियां वे फर्जी इकाइयां होती हैं जो सिर्फ कागजों पर अस्तित्व में रहती हैं. इनका कोई वास्तविक व्यवसाय, स्थायी कार्यालय या वास्तविक कर्मचारी नहीं होते. वित्तीय घोटालों और काले धन को सफेद करने में इनका बहुतायत से इस्तेमाल किया जाता है, जिन पर केंद्रीय एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं.

7 बैंकों के कंसोर्टियम को लगा झटका

संतोष ओवरसीज और उसके प्रमोटरों ने आईडीबीआई (IDBI) बैंक के नेतृत्व वाले 7 बैंकों के समूह से करीब 450 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था. फिलहाल ED की टीमें कंपनी के प्रमोटरों, उनसे जुड़ी सहयोगी कंपनियों और संदिग्ध मददगारों के परिसरों पर दस्तावेजों और वित्तीय सुरागों को खंगालने में जुटी हैं. माना जा रहा है कि इस छापेमारी के बाद कई अन्य अहम खुलासे हो सकते हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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