प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद में कई ठिकानों पर छापेमारी की है. यह कार्रवाई ओडिशा के ARSS ग्रुप और AMR/AMRL ग्रुप के प्रमोटरों तथा निदेशकों के खिलाफ की जा रही है.
अनियमित ऋण से जुड़ा है मामला
ईडी के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह पूरी जांच ‘एसआरईआई इक्विपमेंट फाइनेंस लिमिटेड’ (SEFL) और ‘एसआरईआई इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस लिमिटेड’ (SIFL) से कथित तौर पर लिए गए फर्जी या अनियमित ऋण (Fraudulent Loans) और उनके भुगतान से जुड़े वित्तीय घोटाले की है. जांच के दायरे में मुख्य रूप से लोग और समूह शामिल हैं.
ARSS ग्रुप: इसके पूर्व निदेशक के परिवार के सदस्य, अनिल अग्रवाल, राजेश अग्रवाल, सुनील अग्रवाल और सुभाष अग्रवाल के ठिकाने
AMR/AMRL ग्रुप: इस समूह और इसके प्रमुख प्रमोटर महेश कुमार रेड्डी अल्थूरु से जुड़े परिसर.
‘राउंड ट्रिपिंग’ की आशंका
प्रवर्तन निदेशालय को अंदेशा है कि इन ऋणों की बड़ी रकम के मामले में ‘एवरग्रीनिंग’ (Evergreening of loans), फंड की हेराफेरी (Diversion of funds) और ‘राउंड ट्रिपिंग’ जैसी गंभीर वित्तीय अनियमितताएं की गई हैं. ईडी इन पैसों के अंतिम इस्तेमाल (End-use) और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की पूरी कड़ी की बारीकी से जांच कर रहा है.
एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि SIFL और SEFL से प्राप्त ऋण राशि का वास्तविक उपयोग कहाँ और किस प्रकार किया गया तथा उसे बैंकों को वापस क्यों नहीं लौटाया गया. इस मामले से जुड़े तमाम महत्वपूर्ण दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड्स की फॉरेंसिक जांच जारी है.
21.19 करोड़ रुपये की संपत्ति हो चुकी है जब्त
उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी ईडी इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए ‘एआरएसएस दमोह-हीरापुर टोल प्राइवेट लिमिटेड’, ‘एआरएसएस इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स लिमिटेड’, ‘अनिल कॉन्ट्रैक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड’ और उनके निदेशकों की भारी-भरकम चल-अचल संपत्तियों को कुर्क (Attach) कर चुकी है.
अब तक जब्त की गई कुल संपत्तियों में 11.82 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति और 9.37 करोड़ रुपये की बैंक जमा राशि शामिल है. इन तीनों कंपनियों और उनके निदेशकों पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के साथ 22.42 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का गंभीर आरोप है. एजेंसी द्वारा की जा रही यह ताज़ा कार्रवाई कोलकाता में दर्ज सीबीआई (CBI) की प्राथमिकी (FIR) के आधार पर शुरू की गई है, और तलाशी पूरी होने के बाद ईडी इस मामले में नए खुलासे कर सकती है.
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