देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से लेकर दिल्ली तक वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर जांच एजेंसियों का हंटर एक बार फिर जोरदार तरीके से चला है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मेगा मिलेनियम प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़े लोगों के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है. इस बड़ी कार्रवाई के दौरान ईडी के हाथ भारी मात्रा में कैश और विदेशी मुद्रा लगी है, जिससे वित्तीय जगत में हड़कंप मच गया है.
कई ठिकानों पर एक साथ ईडी की रेड
प्राप्त जानकारी के अनुसार, केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी इस वक्त मुंबई, दिल्ली और महाराष्ट्र के अलग-अलग इलाकों में लगभग आधा दर्जन ठिकानों पर एक साथ रेड कर रही है. जांच के दायरे में मुख्य रूप से कंपनी के आधिकारिक दफ्तर, उसके निदेशकों के मुंबई और दिल्ली स्थित आलीशान आवास और एक फॉर्महाउस शामिल हैं. शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि इस पूरे नेटवर्क के केंद्र में हरीश देढिया नाम के एक कारोबारी और कंसल्टेंट हैं, जो मुंबई में सक्रिय हैं.
जांच एजेंसियों का आरोप है कि मेगा मिलेनियम कंपनी और उसके निदेशकों को दुबई और सिंगापुर की कुछ संदिग्ध विदेशी कंपनियों से भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा ट्रांसफर की गई है.
डमी कंपनियों के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग का खेल
ईडी की शुरुआती पड़ताल में यह खुलासा हुआ है कि हरीश देढिया ने अपने ही ऑफिस के कर्मचारियों और अन्य डमी लोगों को आगे करके कई फर्जी कंपनियां खड़ी की थीं. हैरान करने वाली बात यह है कि इन कंपनियों के गठन के महज एक साल के भीतर ही इनके बैंक खातों में सैकड़ों करोड़ रुपये पहुंच गए. इसके बाद इस अवैध रकम को कई शेल (फर्जी) कंपनियों के जाल के जरिए इधर-उधर ट्रांसफर किया गया, ताकि पैसे के असली स्रोत और मालिक को छुपाया जा सके.
फिलहाल, ईडी की यह छापेमारी अभी भी अलग-अलग ठिकानों पर जारी है. इस कार्रवाई के दौरान अब तक करोड़ों रुपये की भारतीय करेंसी, विदेशी मुद्रा और कई कीमती सामान जब्त किए जा चुके हैं. एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क के तार विदेश से लेकर देश के भीतर तक खंगाल रही है ताकि यह साफ हो सके कि इस काले धन का इस्तेमाल कहां-कहां और किस मकसद से किया जा रहा था.
-भारत एक्सप्रेस
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